कच्चे तेल का झटका, बाज़ार सहमा! पर अप्रैल में Sensex-Nifty की दमदार वापसी

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
कच्चे तेल का झटका, बाज़ार सहमा! पर अप्रैल में Sensex-Nifty की दमदार वापसी
Overview

गुरुवार को भारतीय शेयर बाज़ार में गिरावट देखी गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मार्केट पर दबाव बनाया। हालांकि, अप्रैल महीना Sensex और Nifty के लिए काफी मजबूत रहा, जो दिसंबर 2023 के बाद इन दोनों बेंचमार्क इंडेक्स का सबसे अच्छा प्रदर्शन था। वहीं, मिड और स्मॉल-कैप शेयरों ने तो बेंचमार्क से भी बेहतर प्रदर्शन कर निवेशकों को मालामाल किया।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव का असर

गुरुवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में आई तेज़ी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने बाज़ार पर दबाव बनाया। Sensex 583 अंक गिरकर 76,914 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 180 अंक लुढ़क कर 23,998 पर आ गया। यह गिरावट तब आई जब ब्रेंट क्रूड की कीमतें युद्धकाल के अपने उच्च स्तर $126 प्रति बैरल को छूने के बाद $113 से नीचे आ गईं।

अप्रैल में Sensex-Nifty की दमदार वापसी, मिड-कैप्स ने किया कमाल

दैनिक गिरावट के बावजूद, अप्रैल का महीना भारतीय शेयरों के लिए बेहद मज़बूत साबित हुआ। पूरे महीने Sensex 6.9% चढ़ा, जबकि Nifty 7.5% बढ़ा। यह दिसंबर 2023 के बाद इन दोनों प्रमुख इंडेक्स का सबसे अच्छा मासिक प्रदर्शन था, जो मार्च की गिरावट के बाद बाज़ार की ज़बरदस्त रिकवरी को दर्शाता है। वहीं, मिड और स्मॉल-कैप शेयरों ने तो बेंचमार्क इंडेक्स को भी पीछे छोड़ दिया। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 13.6% उछला, जो नवंबर 2020 के बाद इसका सबसे अच्छा मंथली गेन था। Nifty Smallcap 100 इंडेक्स 18.4% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज कर मई 2014 के बाद का अपना सबसे बड़ा मासिक उछाल दिखाया। सभी सेक्टर्स के इंडेक्स अप्रैल में हरे निशान में बंद हुए, जिसमें Nifty Realty सेक्टर 22% के साथ सबसे आगे रहा।

अर्थव्यवस्था पर बढ़ता तेल का संकट

पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष और प्रमुख तेल मार्गों में संभावित रुकावटों का खतरा भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 47% बढ़ गई हैं। भारत, जो अपने 85% तेल का आयात करता है, कीमतों में अचानक वृद्धि के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। विश्लेषकों का अनुमान है कि तेल की कीमतों में हर $10 की वृद्धि भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को जीडीपी के 0.30-0.40% तक बढ़ा सकती है और महंगाई को 30-50 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ा सकती है। ऊर्जा की बढ़ती लागत और करेंसी में उतार-चढ़ाव पहले से ही रुपये को प्रभावित कर रहे हैं, जो 30 अप्रैल 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 95.1263 पर पहुंच गया था। इससे भारत की आयात लागत बढ़ जाती है और महंगाई बढ़ती है, जो कंपनियों के मुनाफे और विकास को नुकसान पहुंचाता है। ऑयल मार्केटिंग, एविएशन और सीमेंट जैसे सेक्टर, जो बहुत अधिक ऊर्जा का उपयोग करते हैं, उच्च लागत से सीधे मार्जिन प्रेशर का सामना करते हैं।

बाज़ारों के लिए आगे क्या हैं जोखिम?

बाहरी झटके बाजार के लिए एक बड़ी चिंता बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता और शिपिंग मार्गों में संभावित व्यवधान भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करते हैं। लंबे समय तक चलने वाला ऊर्जा संकट (energy shock) लगातार महंगाई बढ़ा सकता है, रुपये को और कमजोर कर सकता है, और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) से नई बिकवाली को बढ़ावा दे सकता है। FPIs ने मार्च 2026 में रिकॉर्ड ₹117,775 करोड़ की बिकवाली की थी, और अप्रैल में भी बिकवाली जारी रही। भू-राजनीतिक भय, बढ़ती ऊर्जा लागत और कमजोर मुद्रा के कारण यह लगातार बहिर्वाह (outflow) बाजार की भावना (market sentiment) को बुरी तरह प्रभावित करता है। इतिहास गवाह है कि तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव अक्सर बाजार में गिरावट (market corrections) से पहले आते हैं। ऊर्जा और परिवहन लागत पर निर्भर सेक्टरों पर दबाव बने रहने की संभावना है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.