Odisha का दमदार प्रदर्शन! West Bengal को पीछे छोड़ GSDP और प्रति व्यक्ति आय में बड़ा उछाल, NITI Aayog की लिस्ट में टॉप पर

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
Odisha का दमदार प्रदर्शन! West Bengal को पीछे छोड़ GSDP और प्रति व्यक्ति आय में बड़ा उछाल, NITI Aayog की लिस्ट में टॉप पर
Overview

यह खबर ओडिशा के लिए बड़ी राहत और पश्चिम बंगाल के लिए एक चुनौती है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, ओडिशा अब Gross State Domestic Product (GSDP) ग्रोथ और प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) दोनों ही मामलों में पश्चिम बंगाल से आगे निकल गया है। NITI Aayog की Fiscal Health Index में ओडिशा को पहला स्थान मिला है।

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आर्थिक विकास की नई तस्वीर

पिछले दो दशकों में ओडिशा ने आर्थिक मोर्चे पर शानदार तरक्की दिखाई है। 2011-12 से 2023-24 के बीच, राज्य के Gross State Domestic Product (GSDP) में औसतन 7.0% की सालाना बढ़ोतरी हुई है। यह पश्चिम बंगाल के 4.7% और देश के 6.0% के औसत से काफी बेहतर है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि भारत के GDP में ओडिशा का योगदान बढ़ा है, जबकि पश्चिम बंगाल का हिस्सा कम हुआ है।

प्रति व्यक्ति आय में भी ओडिशा आगे

प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) में भी ओडिशा ने पश्चिम बंगाल को पीछे छोड़ दिया है। 2000-01 में ओडिशा की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत का 56% से भी कम थी। वहीं, 2024-25 तक यह बढ़कर ₹1,68,966 हो गई है, जो पश्चिम बंगाल के ₹1,63,467 से थोड़ा ज्यादा है। इस तरह ओडिशा अब राष्ट्रीय औसत का 82% पहुंच गया है, जबकि पश्चिम बंगाल 80% पर है।

फिस्कल हेल्थ का मजबूत आधार

NITI Aayog की Fiscal Health Index रिपोर्ट भी दोनों राज्यों के बीच एक बड़ा अंतर दिखाती है। ओडिशा 73.1 अंकों के साथ 18 बड़े राज्यों में पहले स्थान पर रहा। इसकी वजह राज्य का मजबूत रेवेन्यू बेस है। ओडिशा का अपना टैक्स रेवेन्यू GSDP का 7% है, जो पश्चिम बंगाल के 5.4% से काफी ज्यादा है। वहीं, माइनिंग (खनिज) से मिलने वाले रेवेन्यू के बूते ओडिशा का नॉन-टैक्स रेवेन्यू GSDP का 6.8% तक पहुंच गया है, जबकि पश्चिम बंगाल इस मामले में सिर्फ 0.2% पर है। इससे ओडिशा को निवेश के लिए अधिक वित्तीय लचीलापन मिलता है।

मानव विकास सूचकांकों में स्थिति

हालांकि, आर्थिक आंकड़ों में ओडिशा आगे है, लेकिन कुछ मानव विकास सूचकांकों (Human Development Indicators) में पश्चिम बंगाल अब भी बेहतर स्थिति में है। ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग खर्च (MPCE) पश्चिम बंगाल में ज्यादा है। गरीबी दर भी पश्चिम बंगाल ( 11.89%) में ओडिशा ( 15.68%) से कम है। जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर (IMR) और मातृ मृत्यु दर (MMR) जैसे मामलों में भी पश्चिम बंगाल की स्थिति थोड़ी बेहतर है। हालांकि, दोनों ही राज्य महिलाओं और बच्चों में एनीमिया (खून की कमी) की ऊंची दर से जूझ रहे हैं।

बदलाव के कारण और आगे की राह

इस आर्थिक बदलाव की मुख्य वजहों में ओडिशा के प्राकृतिक संसाधन, खासकर खनिज संपदा, प्रभावी शासन (governance), वित्तीय अनुशासन और आपदा प्रबंधन शामिल हैं। पश्चिम बंगाल को उद्योग बढ़ाने और रेवेन्यू जुटाने में संरचनात्मक (structural) चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, भले ही उसके पास मानव पूंजी (human capital) अच्छी है। भविष्य की बात करें तो, ओडिशा को अपने आर्थिक विकास को बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में बदलना होगा, वहीं पश्चिम बंगाल को रिकवरी के लिए उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा करना होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.