OECD की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर बन रहे हालात, जैसे भू-राजनीतिक तनाव, वित्तीय स्थितियों का सख्त होना और सप्लाई चेन में रुकावटें, भारत की आर्थिक ग्रोथ को थोड़ा धीमा कर सकती हैं। हालांकि, OECD का मानना है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा। लेकिन, FY27 के लिए महंगाई का अनुमान पहले के अनुमानों से काफी बढ़ा दिया गया है। जहां पहले महंगाई दर 4% के आसपास रहने का अनुमान था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से पिछले साल की फूड और एनर्जी कीमतों में आई कमी का असर खत्म होने और हाल में वैश्विक एनर्जी कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि अन्य एजेंसियों के अनुमान अलग हैं। उदाहरण के लिए, S&P Global ने भारत के FY27 GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। यह दिखाता है कि देश की घरेलू मांग (domestic demand) और टेक सेक्टर में मजबूती से ग्रोथ को सहारा मिलने की उम्मीद है। OECD का 6.1% का अनुमान इस मजबूत घरेलू पिक्चर के मुकाबले थोड़ा कम है, जो बाहरी दबावों की ओर इशारा करता है।
भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। खासकर मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनावों के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent crude) की कीमतें 2026 में औसतन $80 प्रति बैरल रह सकती हैं, और 2026 की शुरुआत में ये $105-$115 तक जा सकती हैं। चूंकि भारत अपनी 80% से ज़्यादा तेल की ज़रूरतें आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में हर $1 का इजाफा सालाना $2 अरब का अतिरिक्त खर्च बढ़ा सकता है, और 10% की बढ़ोतरी महंगाई को 0.3% तक बढ़ा सकती है। सरकार का कहना है कि भारत के पास करीब 60 दिनों का फ्यूल रिजर्व है और सप्लाई लाइन सुरक्षित है। सरकार ने रिटेल महंगाई दर को 4% ( 2-6% के टॉलरेंस बैंड के साथ) तक सीमित रखने का लक्ष्य मार्च 2031 तक बनाए रखा है। हालांकि, बढ़ती ऊर्जा कीमतों के बीच इस लक्ष्य को हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा।
ICICI बैंक का अनुमान है कि एनर्जी लागत और CPI बास्केट में बदलाव के कारण FY27 में भारत की रिटेल महंगाई 4.5% तक पहुंच सकती है। वहीं, RBI ने FY27 के लिए महंगाई का अनुमान Q1 में 4.0% और Q2 में 4.2% लगाया है। कुल मिलाकर, FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.1% से 7.1% के बीच है, जो देश को एक प्रमुख ग्लोबल ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित करता है। हालांकि, लगातार ऊंचे एनर्जी दाम और वैश्विक अनिश्चितताएं चिंता का विषय बनी रहेंगी। RBI अपनी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर सावधानी बरतेगा और देश को इन बाहरी चुनौतियों से निपटने के लिए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स (structural reforms) पर ध्यान देना होगा।