India की GDP ग्रोथ पर Nomura का बड़ा अनुमान, West Asia टेंशन का साया
Nomura ने India की आर्थिक रफ्तार को लेकर एक अहम रिपोर्ट जारी की है। ब्रोकरेज फर्म ने वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए India की GDP ग्रोथ के अनुमान को 7.1% से घटाकर 7.0% कर दिया है। इस कटौती के पीछे West Asia में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरे को मुख्य वजह बताया गया है।
ऊर्जा संकट से Inflation और Deficit बढ़ने का खतरा
Nomura का अनुमान है कि West Asia के हालात ऐसे ही बिगड़े रहे तो India में महंगाई (Inflation) का बोझ बढ़ सकता है। FY27 के लिए Inflation का अनुमान 3.8% से बढ़ाकर 4.5% कर दिया गया है। वहीं, चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit - CAD) भी GDP के 1.2% से बढ़कर 1.6% तक पहुंच सकता है। India जैसे देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात (Import) करता है, यह एक गंभीर चिंता का विषय है। फिलहाल, Brent क्रूड ऑयल $87 प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है।
लॉजिस्टिक्स से प्रोडक्शन पर शिफ्ट हुई चिंता
शुरुआत में West Asia में समस्या को सिर्फ शिपिंग रूट (Shipping Routes) और लॉजिस्टिक्स (Logistics) तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन अब असली चिंता तेल उत्पादन क्षमता (Production Capacity) को लेकर है। Iraq और Kuwait जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने स्टोरेज लिमिट और शिपिंग बाधाओं के कारण अपने उत्पादन में कटौती की है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस रूके हुए उत्पादन को फिर से शुरू करना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें कई हफ्तों का समय लग सकता है। इस बीच, International Energy Agency (IEA) ने कीमतों को स्थिर रखने के लिए अपने सामरिक भंडार (Strategic Reserves) से 40 करोड़ बैरल तेल जारी किया है।
India की Vulnerability और Policy पर असर
लंबे समय तक तेल की ऊंची कीमतें India की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकती हैं। इससे Reserve Bank of India (RBI) को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को और सख्त करना पड़ सकता है, जो मौजूदा ग्रोथ को धीमा कर सकती है। साथ ही, देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) पर भी दबाव बढ़ सकता है।
आगे क्या? भू-राजनीतिक जोखिम पर टिकी नजर
Nomura अभी भी India में एक साइक्लिकल इकोनॉमिक रिबाउंड (Cyclical Economic Rebound) की उम्मीद कर रही है। हालांकि, यह पूरी तरह से West Asia की भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर ऊर्जा आपूर्ति में कोई बड़ी बाधा आती है, तो यह अनुमानों को आसानी से पलट सकता है। ऐसे में, निवेशकों और पॉलिसीमेकर्स को कच्चे तेल की कीमतों और उनके प्रभाव पर पैनी नजर रखनी होगी।