नीति आयोग (Niti Aayog) ने 2026 के लिए अपना पहला इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स (Investment Friendliness Index) जारी किया है। इस इंडेक्स में महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्य सबसे ऊपर हैं, जो भारत में आने वाले विदेशी निवेश (FDI) का बड़ा हिस्सा आकर्षित कर रहे हैं। यह रिपोर्ट राज्यों के बीच आर्थिक खाई को भी उजागर करती है, जहाँ टॉप 5 राज्यों में ही कुल विदेशी पूंजी का लगभग **85%** हिस्सा आता है।
नीति आयोग का पहला इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स
नीति आयोग ने 2026 के लिए अपना पहला इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स (Investment Friendliness Index) जारी किया है। यह इंडेक्स राज्यों को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाने का रोडमैप तैयार करता है। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) की गुणवत्ता, सरकारी नीतियां (Government Policy) और बिजनेस का माहौल जैसे महत्वपूर्ण मापदंडों पर राज्यों को रैंक किया गया है। इस शुरुआती मूल्यांकन में गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु और गोवा सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के रूप में उभरे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजनेस माहौल की रैंकिंग
इंडेक्स में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को सबसे अधिक महत्व दिया गया है, जिसका कुल स्कोर में 25% का योगदान है। इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में गुजरात शीर्ष पर है, जिसके बाद तमिलनाडु और केरल का स्थान आता है। वहीं, बिजनेस माहौल (Business Climate) की श्रेणी में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा, जिसके बाद कर्नाटक और तमिलनाडु का नंबर आया। इंडेक्स यह भी बताता है कि उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्य विभिन्न व्यापार-अनुकूल मापदंडों पर टॉप टेन में अपनी जगह बना रहे हैं।
FDI का संकेन्द्रण और आर्थिक असमानता
यह रिपोर्ट एक बड़ी संरचनात्मक समस्या को सामने लाती है: कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) का अत्यधिक संकेन्द्रण। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली और तमिलनाडु मिलकर भारत के कुल FDI का लगभग 85% आकर्षित करते हैं। यह अंतर पूर्वोत्तर राज्यों के साथ और भी स्पष्ट हो जाता है, जो सामूहिक रूप से कुल विदेशी पूंजी का 1% से भी कम प्राप्त करते हैं। निवेशकों के लिए, यह असमानता बताती है कि पश्चिम और दक्षिण भारत के कुछ खास औद्योगिक कॉरिडोर अन्य क्षेत्रों की तुलना में तेज़ी से क्यों बढ़ रहे हैं।
राष्ट्रीय निवेश के रुझान
व्यापक आर्थिक डेटा से पता चलता है कि भारत की निवेश दर (Investment Rate) लचीली बनी हुई है, जो वित्तीय वर्ष 2025 में 29.9% GDP पर पहुँच गई है, जो दशक के औसत 29.1% से ऊपर है। सरकारी और घरेलू खर्च इस वृद्धि के मुख्य चालक रहे हैं, वहीं निजी पूंजीगत व्यय (Private Capital Spending) में भी 8.7% की वृद्धि देखी गई है। हालाँकि, सार्वजनिक व्यय की तुलना में निजी निवेश की धीमी गति बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बनी हुई है। ऐतिहासिक रूप से, सतत आर्थिक विकास के लिए निजी खर्च में निरंतर वृद्धि की आवश्यकता होती है, जैसा कि जापान के युद्धोत्तर काल में निवेश-आधारित विस्तार देखा गया था।
जैसे-जैसे नीति आयोग का इंडेक्स गति पकड़ेगा, राज्यों द्वारा अपनी नीतियों को बेहतर बनाने के लिए इन निष्कर्षों का उपयोग कैसे किया जाता है, इस पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि क्या कम रैंक वाले राज्य अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव या बुनियादी ढांचे के उन्नयन की शुरुआत करते हैं, जिससे वर्तमान टॉप-परफॉर्मिंग क्षेत्रों से परे नए औद्योगिक हब खुल सकते हैं।
