Nilesh Shah: $100 प्रति बैरल कच्चा तेल मचा सकता है बाजार में हड़कंप!

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Nilesh Shah: $100 प्रति बैरल कच्चा तेल मचा सकता है बाजार में हड़कंप!

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी (Kotak Mahindra AMC) के एमडी, निलेश शाह ने भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ा संकेत दिया है। उनका मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें **$100** प्रति बैरल के पार गईं, तो यह बाजार में करेक्शन (Market Correction) ला सकता है।

Detailed Coverage

$100 का लेवल क्यों है खतरनाक?

निलेश शाह ने कहा कि मौजूदा बाजार की चाल तो ठीक है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों का $100 प्रति बैरल के पार जाना एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। यह खासकर भारत जैसे देश के लिए चिंता का विषय है, जो आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। वैश्विक कमोडिटी (Commodity) की कीमतों में अचानक उछाल भारत की इकोनॉमी पर भारी पड़ सकता है, जिससे बाजार में गिरावट आ सकती है।

इकोनॉमी की मजबूती और कमाई का भरोसा

वैश्विक स्तर पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन और मौसम के पैटर्न जैसी चिंताओं के बावजूद, निलेश शाह भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। उनका कहना है कि सरकार की नीतियों और स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स की वजह से ग्रोथ बनी रहेगी।

निवेशकों को आने वाले समय में कंपनियों की कमाई (Corporate Earnings) पर नज़र रखनी चाहिए। निलेश शाह को उम्मीद है कि सितंबर तिमाही के नतीजे जून तिमाही से बेहतर रहेंगे। जून तिमाही में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को मार्जिन की दिक्कतें आई थीं। अगर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो कंपनियों की कमाई में सुधार देखने को मिलेगा।

फाइनेंशियल सेक्टर में क्या हैं मौके?

फाइनेंशियल सेक्टर की बात करें तो निलेश शाह ने पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSU Banks) और बड़े प्राइवेट बैंकों के बीच अंतर देखा है। कुछ सरकारी बैंकों का प्रदर्शन शानदार रहा है और वे आकर्षक बने हुए हैं। वहीं, बड़े प्राइवेट बैंकों में हाल में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की बिकवाली बढ़ी है।

उन्होंने यह भी बताया कि नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFCs), इंश्योरेंस और कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों में भी अच्छे मौके बन रहे हैं। निवेशकों को सिर्फ शेयर की टाइमिंग देखने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स पर ध्यान देना चाहिए।

मौसम का असर और लॉन्ग-टर्म रिस्क

एल नीनो (El Niño) जैसे मौसम के पैटर्न पर भी नजर रखी जा रही है। शाह ने कहा कि बाजार ने इस रिस्क को काफी हद तक डिस्काउंट कर दिया है। लेकिन, अगर मॉनसून में सामान्य से 10% से ज़्यादा की कमी आती है, तो कृषि उत्पादन और महंगाई (Inflation) पर असर पड़ सकता है। ये चीजें बाजार की मौजूदा सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकती हैं।

विदेशी निवेश और भारत का आकर्षण

निलेश शाह ने FCNR(B) स्कीम का भी जिक्र किया, जिससे नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) से विदेशी मुद्रा (Forex) को आकर्षित किया जा सकता है। यह विदेशी निवेशकों को ग्लोबल स्तर पर कम यील्ड (Yield) के माहौल में भारत-केंद्रित जोखिम लेने का मौका देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ स्कीम होने से काम नहीं चलेगा, बल्कि लगातार एफर्ट्स और आसान प्रक्रियाएं भी जरूरी हैं। लंबी अवधि में, भारत एक स्थिर निवेश डेस्टिनेशन बना रहेगा, जिसे 'AI हेज' के तौर पर भी देखा जा रहा है, जो निवेशकों का भरोसा बढ़ा रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.