भारतीय शेयर बाज़ारों में आज शानदार तेजी देखने को मिली, जहां Nifty 50 ने **24,200** का आंकड़ा पार कर लिया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने **₹2,981 करोड़** से ज़्यादा का निवेश किया। IT और फार्मा शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई। हालांकि, अमेरिका का एक प्रस्तावित बिल रूस के साथ ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों पर **100%** तक टैरिफ लगाने का प्रावधान रखता है, जो भारतीय निर्यात के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है।
बाज़ार में आई तेज़ी, Nifty ने तोड़े रिकॉर्ड
सप्ताह की शुरुआत में भारतीय शेयर बाज़ारों में तेज़ी का रुख रहा। Nifty 50 इंडेक्स 24,200 के पार निकल गया, जबकि Sensex ने 850 अंकों की छलांग लगाई। इस उछाल की मुख्य वजह व्यापक खरीदारी थी, खासकर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, मेटल और फार्मा सेक्टर में।
विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार
इस सकारात्मक चाल को संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी से बल मिला। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने ₹2,981.87 करोड़ के शेयर्स खरीदे, वहीं डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने भी ₹998.02 करोड़ का निवेश किया।
रुपया मजबूत, पर भू-राजनीतिक जोखिम?
भारतीय रुपया लगातार चौथे सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत बना रहा। यह तब और भी खास है जब ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $87 प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जो आमतौर पर रुपए के लिए नकारात्मक होता है। रुपए को डॉलर में नरमी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर आने वाले फैसलों से सहारा मिला।
अमेरिकी बिल से निर्यात पर खतरा?
फिलहाल बाज़ार में उत्साह के बावजूद, अमेरिका से एक संभावित बड़ा जोखिम उभर रहा है। अमेरिकी सीनेट में एक द्विपक्षीय बिल शुरुआती प्रक्रिया से गुजर चुका है, जिसका मकसद रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इस बिल में एक प्रावधान है कि जो देश रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदते हैं, उन पर 100% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। चूँकि भारत रूस के साथ ऊर्जा व्यापार करता है, यह बिल अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर क्षेत्रों के लिए अनिश्चितता पैदा करता है। निवेशकों को इस बिल पर नज़र रखनी होगी कि क्या यह आगे बढ़ता है, क्योंकि यह भविष्य में व्यापार नीतियों को प्रभावित कर सकता है।
अब अर्निंग्स पर फोकस
बाज़ार अब पहली तिमाही के नतीजों (First Quarter Earnings Season) के दौर में प्रवेश कर रहा है। कंपनियों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि हालिया बाज़ार की तेज़ी वास्तविक बिज़नेस ग्रोथ पर आधारित है या नहीं। निवेशकों का ध्यान अब Dabur India, Eicher Motors, Bajaj Housing Finance और TeamLease जैसी कंपनियों के आने वाले नतीजों पर है। इन कंपनियों की लागत प्रबंधन क्षमता और गिरती-बढ़ती ऊर्जा कीमतों व व्यापार नीतियों के बीच मार्जिन बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी।
