वैश्विक बाजार से मिले कमजोर संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार आज गिरावट के साथ खुल सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें **$75** प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। निवेशक ऊंचे ऊर्जा लागत से महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी और एसआईपी (SIP) योगदान से बाजार को सहारा मिलने की उम्मीद है।
कच्चे तेल का अर्थव्यवस्था पर असर
आज, 13 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत चुनौतीपूर्ण रहने की संभावना है। गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) इंडेक्स में करीब 200 अंकों की बड़ी गिरावट का संकेत मिल रहा है, जो प्रमुख एशियाई बाजारों जैसे जापान के निक्केई (Nikkei) और दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) में भी दिख रही सतर्कता को दर्शाता है। इस नकारात्मक भावना का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों का अचानक तेज होना है, जिसने वैश्विक वित्तीय बाजारों को अस्थिर कर दिया है।
घरेलू अर्थव्यवस्था पर कच्चे तेल का सीधा असर
निवेशकों की नजरें कच्चे तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी पर हैं, जो $74 से $75 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत, जो ऊर्जा का एक बड़ा आयातक देश है, के लिए तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि दोहरे जोखिम पैदा करती है। इससे घरेलू महंगाई बढ़ सकती है और आयात बिल बढ़ने से चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) पर भी दबाव आ सकता है। खास तौर पर, निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि इसका असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मुनाफे पर कैसे पड़ेगा, क्योंकि जून तिमाही के नतीजों में इन पर मार्जिन दबाव देखने को मिल सकता है।
कमाई का अनुमान और सेक्टर प्रदर्शन
भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, कॉर्पोरेट आय (Earnings) का परिदृश्य मजबूत बना हुआ है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (Motilal Oswal Financial Services) के आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 26 से 28 तक कॉर्पोरेट मुनाफे में सालाना 15% की चक्रवृद्धि दर से वृद्धि का अनुमान है। हालांकि, तेल और गैस से जुड़ी कंपनियों के कारण Q1FY27 में समग्र आय वृद्धि में साल-दर-साल 3% की मामूली गिरावट आ सकती है, लेकिन बाकी कॉर्पोरेट जगत मजबूती दिखा रहा है। तेल और गैस को छोड़कर, अन्य कंपनियों के मुनाफे में सालाना 14% की स्वस्थ वृद्धि की उम्मीद है। बैंकिंग, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC), मेटल और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टर इस तिमाही में विकास के मुख्य चालक रहने की उम्मीद है।
संस्थागत समर्थन बरकरार
बाजार को प्रमुख संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी का सहारा मिल रहा है। पिछले हफ्ते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने ₹4,670 करोड़ का शुद्ध निवेश किया, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹8,280 करोड़ का निवेश किया। इसके अलावा, खुदरा निवेशकों का भरोसा भी कायम है, जून 2026 में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) का योगदान तीन महीने के उच्च स्तर ₹317.8 अरब पर पहुंच गया। ये मजबूत प्रवाह बाहरी अस्थिरता के खिलाफ एक सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं।
निवेशक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और Q1FY27 की जारी आय रिपोर्टों पर नजर बनाए रख सकते हैं। ऑटोमोबाइल, सीमेंट और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों की कंपनियां इनपुट लागत दबाव को कैसे प्रबंधित करती हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि ये क्षेत्र वर्तमान में संभावित हेडविंड का सामना कर रहे हैं जो उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
