भारतीय शेयर बाज़ार में आज तेजी की उम्मीद है। अमेरिका से आए रोज़गार के आंकड़े उम्मीद से कम रहे, जिससे ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका कम हुई है। इसका असर ग्लोबल मार्केट के साथ-साथ Nifty पर भी सकारात्मक दिख सकता है।
अमेरिकी रोज़गार डेटा और बाज़ार का मिजाज
शुक्रवार को एशियाई शेयर बाज़ारों में मिले-जुले कारोबार देखने को मिल रहा है। इसकी वजह अमेरिका से जारी हुए लेबर मार्केट के आंकड़े हैं। जून महीने में अमेरिका में रोज़गार सृजन (Job Creation) की रफ्तार धीमी पड़ी है, और पिछले महीनों के आंकड़ों में भी कटौती की गई है। ख़ास बात यह है कि बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) मई में 4.3% से घटकर 4.2% पर आ गई है। हालांकि, इस गिरावट की एक बड़ी वजह लेबर फ़ोर्स पार्टिसिएशन रेट (Labor Force Participation Rate) का पांच साल के निचले स्तर पर पहुंचना है, क्योंकि कई लोग काम की तलाश से बाहर हो गए हैं।
वैश्विक निवेशकों के लिए, यह आंकड़े इशारा करते हैं कि फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) पर तुरंत ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव कम हो सकता है। अमेरिकी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के इस रुख में बदलाव अक्सर डॉलर और बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) को प्रभावित करता है, जिसका असर भारत जैसे उभरते बाज़ारों में कैपिटल फ्लो (Capital Flow) पर पड़ता है।
Nifty का टेक्निकल आउटलुक
Nifty इंडेक्स ने पिछले दो दिनों में लगातार बढ़त दर्ज करते हुए मजबूती दिखाई है। डेली चार्ट पर, इंडेक्स हायर हाईज़ (Higher Highs) और हायर लोज़ (Higher Lows) का पैटर्न बना रहा है, जो खरीदारी में दिलचस्पी को दर्शाता है। फिलहाल, इंडेक्स 23,800 से 23,900 के सपोर्ट ज़ोन में बना हुआ है। यह वही रेंज है जहां इसका 20-दिन और 50-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) भी आ रहा है।
टेक्निकल तौर पर, इन मूविंग एवरेज का क्रॉस करना मौजूदा मोमेंटम (Momentum) के जारी रहने का संकेत दे सकता है। इंडेक्स के लिए इमीडिएट ट्रेडिंग रेंज 24,000 से 24,050 के आसपास है। निवेशक इस बात पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं कि क्या इंडेक्स 23,800 के स्तर से ऊपर बना रह सकता है, जो मौजूदा सकारात्मक ट्रेंड के लिए एक अहम आधार का काम कर रहा है।
ग्लोबल और सेक्टर का संदर्भ
हालांकि बाज़ार में कुल मिलाकर सावधानी का माहौल है, एशियाई बाज़ारों का अनुभव अलग-अलग है। उदाहरण के लिए, दक्षिण कोरिया का Kospi सेमीकंडक्टर शेयरों में गिरावट के कारण कमजोर रहा, जो अमेरिका में लिस्टेड ऐसी कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाता है। जापान में, Nikkei 225 इंडेक्स 1% गिर गया। ये क्षेत्रीय अंतर इस बात को उजागर करते हैं कि जहां अमेरिका के मैक्रो इकोनॉमिक आंकड़े एक साझा पृष्ठभूमि प्रदान करते हैं, वहीं स्थानीय सेक्टर प्रदर्शन और क्षेत्रीय आर्थिक कारक विशिष्ट बाज़ार की चाल को प्रभावित करते रहते हैं।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए
जैसे-जैसे ट्रेडिंग का दिन आगे बढ़ेगा, निवेशकों के लिए मुख्य ध्यान Nifty के 23,800 और 23,900 के सपोर्ट लेवल से ऊपर बने रहने पर होगा। इसके अलावा, प्रतिभागी सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के मूवमेंट पर भी नज़र रखेंगे, जो अमेरिकी बाज़ार के संकेतों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील रहे हैं। अंत में, जॉब्स रिपोर्ट के बाद ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स का व्यापक ट्रेंड एक महत्वपूर्ण कारक बना रहेगा, क्योंकि यह प्रभावित करता है कि अंतर्राष्ट्रीय पूंजी इक्विटी बाज़ारों में कैसे आवंटित की जाती है।
