Nifty में वापसी! साप्ताहिक एक्सपायरी के बीच **24,100** के करीब बाजार

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AuthorNeha Patil|Published at:
Nifty में वापसी! साप्ताहिक एक्सपायरी के बीच **24,100** के करीब बाजार

आज शेयर बाजार में निचले स्तरों से रिकवरी देखने को मिली है। साप्ताहिक एक्सपायरी के कारण उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी (Nifty) **24,100** के आसपास कारोबार कर रहा है।

हफ्ते की एक्सपायरी का असर

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों ने मजबूती दिखाई और सुबह की गिरावट से उबरते हुए अच्छी रिकवरी दर्ज की। शुरुआती नुकसान को कुछ हद तक कम करते हुए Sensex अपने दिन के निचले स्तर से 200 अंकों से ज्यादा सुधरकर 77,221 के करीब पहुंच गया, वहीं Nifty 24,119 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

बाजार में यह उतार-चढ़ाव काफी हद तक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की साप्ताहिक एक्सपायरी से जुड़ा है। ऐसे समय में, जब ट्रेडर्स और बड़े निवेशक अपनी पोजीशन्स को अगले साइकल के लिए बंद या रोल ओवर करते हैं, तो बाजार में वोलेटिलिटी (Volatility) बढ़ जाती है। इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम (Trading Volume) भी बढ़ता है और स्टॉक की कीमतों में अचानक बड़े मूव्स देखने को मिल सकते हैं, खासकर सेटलमेंट विंडो के करीब।

बाजार की नजरें सपोर्ट लेवल पर

टेक्निकल एनालिस्ट्स (Technical Analysts) के मुताबिक, Nifty के लिए 24,000 का लेवल एक अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है। बाजार की मौजूदा चाल के अनुसार, यह साइकोलॉजिकल लेवल इंडेक्स के लिए एक फ्लोर की तरह काम कर रहा है। अगर बाजार इस लेवल से ऊपर बना रहता है, तो यह 24,300 के रेजिस्टेंस जोन (Resistance Zone) को तोड़ने की कोशिश कर सकता है। वहीं, अगर इंडेक्स 24,000 का लेवल होल्ड करने में नाकाम रहता है, तो यह 23,800 के निचले सपोर्ट लेवल की ओर जा सकता है। ऐसे में 24,000 और 24,300 के बीच की रेंज बाजार की नियर-टर्म डायरेक्शन तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगी।

वैल्यू बाइंग की भूमिका

वैल्यू बाइंग (Value Buying) तब होती है जब निवेशकों को लगता है कि शेयरों की कीमतों में आई हालिया गिरावट के कारण वे उनकी असली कीमत से सस्ते हो गए हैं। सुबह के ट्रेड में जब बाजार तेजी से नीचे गिरा, तो इन निवेशकों ने क्वालिटी स्टॉक्स (Quality Stocks) को डिस्काउंट रेट पर खरीदने के लिए एंट्री ली। इस एक्टिविटी से डिमांड बढ़ी, जिसने इंडेक्स को स्थिर करने और गिरावट को रोकने में मदद की। हालांकि, यह राहत अस्थायी हो सकती है और बाजार की लॉन्ग-टर्म दिशा कंपनी के नतीजों, ग्लोबल मार्केट के ट्रेंड्स और देश की ओवरऑल इकोनॉमिक परफॉर्मेंस जैसे बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी।

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