मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदें और गिरते कच्चे तेल ने बढ़ाई रफ्तार
बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ती शांति की उम्मीदें और कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में नरमी रही। इन सकारात्मक संकेतों के बीच Nifty 50 इंडेक्स ने 24,000 के अहम स्तर को पार कर लिया।
6 हफ्तों की गिरावट का सिलसिला टूटा, 5 साल की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी
शुक्रवार, 11 अप्रैल, 2026 को Nifty 50 इंडेक्स 275 अंकों की उछाल के साथ 24,050.60 पर बंद हुआ। इस हफ्ते इंडेक्स ने 5.88% की शानदार बढ़त दर्ज की, जो पिछले 5 सालों में सबसे दमदार साप्ताहिक परफॉरमेंस है। इसने लगातार 6 हफ्तों की गिरावट का सिलसिला भी तोड़ दिया। बाजार में जोश भरने की मुख्य वजह यूएस और ईरान के बीच दो हफ्तों के सीज़फायर (Ceasefire) की खबरें और कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें थीं। इससे भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ और कच्चे तेल के दाम गिरने लगे। इसी सकारात्मक माहौल का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा, जहाँ जापान का Nikkei 225 1.84% चढ़ गया।
Nifty का मौजूदा प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो 21.1 है, जो ऐतिहासिक औसत 20-21 के मुकाबले थोड़ा महंगा कहा जा सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, Nifty के लिए इमीडिएट रेजिस्टेंस (Resistance) 24,200-24,250 के आसपास है, जबकि सपोर्ट 23,750-23,800 पर बना हुआ है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कच्चे तेल का उतार-चढ़ाव
हालांकि, इस रैली की मजबूती इस नाजुक शांति समझौते पर टिकी है। कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद, 10 अप्रैल, 2026 को WTI क्रूड ऑयल करीब $95.5 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। मिडिल ईस्ट के संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावटों के चलते पहली तिमाही (Q1 2026) में इनमें काफी उछाल देखा गया था। विश्लेषकों का कहना है कि अगर यूएस-ईरान के बीच पक्का समझौता नहीं होता या इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई जारी रहती है, तो यह अस्थिरता फिर बढ़ सकती है और तेल की कीमतें ऊपर जा सकती हैं। इसका सीधा असर भारत के ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) और महंगाई पर पड़ेगा।
भारतीय रुपया (Indian Rupee) भी चिंता का विषय बना हुआ है। RBI की कोशिशों के बावजूद, यह लगातार दूसरे दिन टूटा है और FY26 में इसमें 9.88% की सालाना गिरावट आई है।
सेक्टरल परफॉरमेंस में मिलाजुला रुख, IT सेक्टर फिसला
सेक्टोरल परफॉरमेंस की बात करें तो ऑटो, रियल्टी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर ने लीड किया, जबकि इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर पिछड़ गया। Nifty IT इंडेक्स शुक्रवार को 1.7% गिर गया। टॉप IT कंपनियों के लिए 10.9% के रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान है, लेकिन इसमें करेंसी में आई कमजोरी का भी बड़ा हाथ है। AI (Artificial Intelligence) के कारण पैदा हुई चिंताओं के चलते यह सेक्टर साल-दर-तारीख (Year-to-date) 25% गिर चुका है।
इसके विपरीत, ब्रॉडर मार्केट्स यानी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में मजबूत निवेशक रुचि दिखी। Nifty Midcap 100 और Smallcap 100 इंडेक्स क्रमशः 1.52% और 1.65% चढ़े।
शुक्रवार को Asian Paints 3.81%, Eicher Motors 3.75% और Bajaj Auto 3.29% चढ़े, वहीं Coal India और Sun Pharma टॉप लूजर्स में रहे।
जोखिम और दिग्गज निवेशकों की चेतावनी
Nifty के अहम स्तरों पर वापस आने के बावजूद, बाजार में बड़े जोखिम बने हुए हैं। अनुभवी निवेशक शंकर शर्मा ने लगातार भू-राजनीतिक तनाव के चलते भारतीय बाजार में फीकी पोर्टफोलियो रिटर्न की चेतावनी दी है। इसके अलावा, 24,000 के लेवल पर बड़ी मात्रा में कॉल ऑप्शन राइटिंग (Call Option Writing) यह संकेत दे रही है कि यहां मजबूत रेजिस्टेंस है और प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking) हो सकती है।
आगे क्या?
एक्सपर्ट्स अभी भी बाजार में अस्थिरता बने रहने की उम्मीद कर रहे हैं। Nifty के लिए इमीडिएट रेजिस्टेंस 24,200-24,250 के बीच है, जबकि सपोर्ट 23,750-23,800 पर है। Choice Broking के Sumeet Bagadia एक पॉजिटिव बायस (Positive Bias) बता रहे हैं, जो कि बुलिश कैंडलस्टिक पैटर्न (Bullish Candlestick Pattern) और 50 से ऊपर RSI को देखते हुए है। वहीं, Prabhudas Lilladher की Vaishali Parekh सावधानी बरतने की सलाह दे रही हैं। उनका कहना है कि आगे की तेजी से पहले 23,500-24,000 के स्तर पर स्थिरता दिखनी चाहिए, जबकि 24,300 पर रेजिस्टेंस और 23,000 पर सपोर्ट है। IT सेक्टर का आउटलुक AI के कारण चिंताजनक बना हुआ है, भले ही 2026 के लिए भारत में IT खर्च में 11.1% वृद्धि का अनुमान है।