बाज़ार पर भू-राजनीतिक तनाव और तेल के झटके का असर
पिछले गुरुवार की तेजी पर आज ब्रेक लग गया। Nifty ने शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को 315 अंक की जोरदार गिरावट के साथ 24,450 पर क्लोजिंग दी। यह 29 अगस्त 2025 के बाद की सबसे निचली क्लोजिंग रही, जिसने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया। दिन के दूसरे हाफ में बिकवाली का दबाव बढ़ा, जिससे शुरुआती बढ़त भी खत्म हो गई और इंडेक्स अपने इंट्राडे लो 24,415.75 के करीब पहुंचा।
Nifty 50 का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹1,95,70,783 करोड़ है, जिसका P/E रेश्यो 21.39 है। 3 मार्च 2026 तक इंडेक्स का P/E 21.76 था, जो मीडियम-टर्म में गिरावट का संकेत देता है। आज के ट्रेडिंग वॉल्यूम भी काफी दमदार रहे, जो 4,334.08 लाख यूनिट्स थे और वैल्यू टर्नओवर ₹35,453.09 करोड़ रहा।
सेक्टरों में दिखी अलग-अलग चाल, IT सेक्टर ने दी राहत
ज़्यादातर सेक्टरल इंडेक्स जहां लाल निशान में बंद हुए, वहीं Nifty IT इंडेक्स इस बिकवाली के बीच एक चमकता सितारा साबित हुआ। Financial Services, Banking और Realty सेक्टरों पर सबसे ज़्यादा दबाव देखने को मिला और उन्होंने सबसे ज़्यादा गिरावट दर्ज की। Nifty Realty इंडेक्स में 13.9% की भारी गिरावट आई। इसके विपरीत, ब्रॉडर मार्केट में कुछ हद तक स्थिरता दिखी; Nifty Midcap 100 में 0.69% और Nifty Smallcap 100 में 0.24% की मामूली गिरावट आई।
तेल की कीमतें, महंगाई और मैक्रोइकोनॉमिक चुनौतियां
पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक सरगर्मी, खासकर अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच तनाव ने ग्लोबल बाज़ारों को झकझोर दिया है। इस वजह से कच्चे तेल की कीमतें $92 प्रति बैरल के पार निकल गईं, जो कोविड-19 महामारी के बाद सबसे तेज़ साप्ताहिक उछाल है। Brent क्रूड $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच रहा है, जो भारत की इकॉनमी के लिए एक बड़ा खतरा है, क्योंकि भारत अपनी ज़रूरत का 80% से ज़्यादा कच्चा तेल इम्पोर्ट करता है।
अनुमान है कि ग्लोबल तेल की कीमतों में 10% की बढ़त से भारत के होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) पर सीधा 0.7-1% का असर पड़ेगा, और अप्रत्यक्ष प्रभावों को मिलाकर कुल WPI महंगाई में 1% की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे चालू खाता घाटा (current account deficit) बढ़ने, रुपए में कमजोरी (91-92/$ की रेंज) और सरकारी सब्सिडी पर दबाव की चिंताएं बढ़ गई हैं।
एक्सपर्ट्स की राय: गिरावट जारी रहने की आशंका, कहां है सपोर्ट?
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि बाज़ार में अस्थिरता (volatility) जारी रह सकती है और ट्रेडिंग सावधानी से की जानी चाहिए। HDFC Securities के नागरज शेट्टी के अनुसार, हालिया गिरावट ने गुरुवार की बुलिश सेंटीमेंट को खत्म कर दिया है और Nifty दोबारा बुधवार के लो 24,300 को टेस्ट कर सकता है, जबकि 24,700 पर इमीडिएट रेजिस्टेंस है।
Centrum Finverse के निलेश जैन ने 24,500 के स्तर के टूटने पर चिंता जताई और कहा कि 24,300 से नीचे गिरने पर इंडेक्स 24,000 तक जा सकता है। वहीं, 24,800 के ऊपर किसी भी उछाल पर बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। LKP Securities के रूपक दे ने कहा कि बेयर्स (Bears) का दबदबा है और ट्रेंड में 'सेल-ऑन-राइज' की रणनीति अपनानी चाहिए, जिससे Nifty 24,000 या उससे नीचे जा सकता है। HDFC Securities के नंदिश शाह ने भी ट्रेंड को मज़बूत रूप से बियरिश बताया और 24,300 व 24,050 को सपोर्ट लेवल माना।
मार्केट वोलेटिलिटी का इंडेक्स, India VIX, भी काफी बढ़ गया है, जो निवेशकों की बढ़ी हुई घबराहट को दर्शाता है।
भविष्य की चिंताएं
ग्लोबल झटकों के साथ-साथ कुछ सेक्टर्स में स्ट्रक्चरल कमजोरियां भी इस गिरावट को बढ़ा रही हैं। Nifty IT का रेज़िलिएंस भले ही सकारात्मक हो, लेकिन Financial Services, Banking और Realty इंडेक्स में भारी गिरावट इन सेक्टर्स की अंदरूनी मुश्किलों को उजागर करती है। बाज़ार मौजूदा स्विंग लोज़ से नीचे ट्रेड कर रहा है, जो मज़बूत कमजोरी का संकेत है।