ट्रेड डील से मिली राहत, पर कमाई के नतीजों का सता रहा डर!
आखिरकार, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर छाई अनिश्चितता खत्म हो गई है। इस डील के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ (Tariffs) को 18% तक कम कर दिया है। इस फैसले से भारतीय बाज़ार के सेंटीमेंट को एक बड़ा बूस्ट मिला है, जिससे शेयर बाज़ारों में खास कर Nifty 50 में एक ज़बरदस्त उछाल देखने को मिला। 7 फरवरी, 2026 को हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, Nifty 50 ने 25,500 के अहम सपोर्ट लेवल को बखूबी डिफेंड किया और दिन के ऊपरी स्तरों के करीब क्लोजिंग दी। वॉल स्ट्रीट (Wall Street) से मिले सकारात्मक संकेतों और खास तौर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर में आई रिकवरी ने भी बाज़ार को सहारा दिया।
अर्निंग्स की अनिश्चितता और मिली-जुली तस्वीर
लेकिन, इस ताज़ी मजबूती के बीच, कॉर्पोरेट अर्निंग्स (Corporate Earnings) का सीज़न शुरू हो रहा है, जो बाज़ार के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। Hindalco और ONGC जैसी बड़ी कंपनियों के नतीजे आने वाले हैं, जिस पर निवेशकों की पैनी नज़र है। हालांकि, कुछ सेक्टर्स जैसे मेटल्स (Metals) और ऑयल एंड गैस (Oil & Gas) में नतीजों के दम पर ग्रोथ दिखी है, लेकिन फाइनेंशियल ईयर 2026 और 2027 के लिए एग्रीगेट ईपीएस (EPS) अनुमानों में बड़ी कटौती की गई है। यह तस्वीर थोड़ी मिली-जुली है, जहां IT सर्विसेज कंपनियों के लिए EPS अपग्रेड्स देखे जा रहे हैं, वहीं फार्मा (Pharma) और टेलीकॉम (Telecom) जैसे सेक्टरों के लिए अनुमानों में गिरावट आई है। इसी बीच, 4 फरवरी को Hindalco Industries के शेयर में 3% की गिरावट देखी गई थी, जो नतीजों के आने से पहले के दबाव को दर्शाता है।
बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और IT सेक्टर का हाल
दूसरी ओर, Nifty Bank इंडेक्स में लगातार मजबूती बनी हुई है। यह इंडेक्स पिछले कई सत्रों से 60,000 के लेवल के ऊपर बना हुआ है, जो फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर की ताकत को दर्शाता है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, Nifty Bank के लिए 60,300-60,400 के ज़ोन में इमीडिएट रेजिस्टेंस (Resistance) है, जबकि 59,700-59,600 के आसपास सपोर्ट मिल सकता है। वहीं, IT सेक्टर की बात करें तो, वॉल स्ट्रीट की तेज़ी के बावजूद, ग्लोबल टेक डाउनटर्न और सेक्टर-स्पेसिफिक प्रेशर का सामना कर रहा है। Nifty IT इंडेक्स में 6 फरवरी को करीब 1.8% की गिरावट आई थी। हालांकि, IT सर्विसेज सेगमेंट में EPS अपग्रेड्स देखने को मिले हैं, जो इस सेक्टर के अंदर भी मिले-जुले संकेत दे रहे हैं।
टेक्निकल वीकनेस और बड़े खतरे
ताज़ा उछाल के बावजूद, तकनीकी संकेत (Technical Indicators) कुछ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। Nifty 50 अपने चार्ट पर लगातार लोअर हाई (Lower High) और लोअर लो (Lower Low) का पैटर्न दिखा रहा है, जिसे तोड़ने के लिए एक निर्णायक ब्रेकआउट (Breakout) की ज़रूरत है। 25,700 के लेवल पर इमीडिएट रेजिस्टेंस है, जबकि 26,000 एक बड़ा हर्डल बना हुआ है। वहीं, 25,500 का लेवल मुख्य सपोर्ट ज़ोन बना हुआ है। इसके अलावा, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की तरफ से लगातार आउटफ्लो (Outflow) देखा जा रहा है, जो ग्लोबल रिस्क एपेटाइट (Risk Appetite) में नरमी का संकेत देता है। इसके विपरीत, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) बाज़ार को सपोर्ट दे रहे हैं। भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और अनिश्चितताओं के माहौल में, ट्रेड डील जैसे लोकल पॉजिटिव डेवलपमेंट पर बाज़ार का टिके रहना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल, Nifty 50 का P/E रेश्यो (Ratio) लगभग 22.3 पर है, जो दर्शाता है कि मार्केट वैल्यूएशन (Valuation) के लिहाज़ से महंगा नहीं है।
आगे क्या? एनालिस्ट्स की राय
एनालिस्ट्स (Analysts) इस समय मिले-जुले संकेत दे रहे हैं और शॉर्ट टर्म में मार्केट के रेंज-बाउंड (Range-Bound) रहने की उम्मीद जता रहे हैं। LKP Securities के Rupak De का मानना है कि इंडेक्स 25,500 और 25,700 के बीच कंसॉलिडेट (Consolidate) कर सकता है, जब तक कि कोई निर्णायक ब्रेकआउट न आए। HDFC Securities के Nagaraj Shetti के अनुसार, 25,800 के ऊपर सस्टेन्ड मूव Nifty को 26,000 और 26,350 की ओर ले जा सकता है, बशर्ते बाज़ार अपनी अपवर्ड मोमेंटम (Upward Momentum) बनाए रखे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अपनी पॉलिसी रेट (Policy Rate) को स्थिर रखने और GDP फोरकास्ट (GDP Forecast) को बढ़ाने से डोमेस्टिक फाइनेंशियल कंडीशंस (Financial Conditions) को कुछ स्थिरता मिली है। हालांकि, बाज़ार की असल दिशा आने वाले अर्निंग सीज़न के कुल नतीजों और ट्रेड डील की पॉजिटिविटी पर निर्भर करेगी, जो संभावित अर्निंग्स की निराशाओं और मौजूदा टेक्निकल हेडविंड्स (Headwinds) पर भारी पड़ सके।