पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। जहां Nifty 50 इंडेक्स **24,000** के पार बना रहा, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मुनाफावसूली (Profit Booking) हावी रही। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) की जोरदार खरीदारी ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया, लेकिन बाजार का कुल मार्केट कैप **₹2 लाख करोड़** से ज्यादा घट गया।
बाजार में दिखी दोहरी चाल
पिछले हफ्ते शेयर बाजार ने एक अनोखी चाल चली। एक तरफ, Nifty 50 इंडेक्स 24,000 के लेवल के आसपास मजबूती से टिका रहा, तो दूसरी तरफ Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap 100 इंडेक्स गिरावट के साथ या सपाट बंद हुए। यह दिखाता है कि कई निवेशकों ने हाल में बढ़े हुए शेयरों को बेचकर अपने मुनाफे को सुरक्षित करना चुना।
खासकर हाई-बीटा स्टॉक्स (जो बाजार के उतार-चढ़ाव के साथ ज्यादा तेजी से हिलते हैं) में बिकवाली का दबाव साफ दिखा। National Aluminium Company, GE Vernova T&D India, Hitachi Energy India, और Tube Investments of India जैसे शेयरों में हफ्ते भर में 5% से लेकर 11% तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, Oracle Financial Services Software, Mahindra & Mahindra Financial Services, और Bharat Forge जैसे कुछ शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए हफ्ते का अंत टॉप गेनर्स के तौर पर किया।
विदेशी बिकवाली, देसी खरीदारी
बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में निवेशकों की अलग-अलग चालों का अहम रोल रहा। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) लगातार बिकवाली करते रहे और ₹2,000 करोड़ से ज्यादा की इक्विटी बेची। लेकिन, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) एक मजबूत सहारे के रूप में सामने आए, जिन्होंने ₹11,000 करोड़ से ज्यादा के शेयर खरीदे। घरेलू फंड्स की इस लगातार खरीदारी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को झेलने में मदद की।
सेक्टरों का हाल: कहां तेजी, कहां मंदी?
अलग-अलग इंडस्ट्रीज में बाजार का मूड काफी अलग रहा। डिफेंसिव और डोमेस्टिक फोकस वाले सेक्टरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। Nifty Pharma इंडेक्स 2% चढ़ गया, और Nifty Realty इंडेक्स 1.7% बढ़ा। Nifty Private Bank और Auto इंडेक्स में भी करीब 1.5% की बढ़त देखी गई।
इसके विपरीत, कुछ सेक्टरों पर भारी दबाव दिखा। Nifty Metal इंडेक्स सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जो 4.4% गिर गया। Consumer Durables, Capital Market, और Energy इंडेक्स में भी 2% से ज्यादा की गिरावट आई। यह दिखाता है कि पैसा उन साइक्लिकल सेक्टरों से निकलकर हेल्थकेयर जैसे सुरक्षित सेक्टरों की ओर जा रहा है।
टेक्निकल व्यू (Technical View)
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि Nifty 50 फिलहाल कंसॉलिडेशन फेज (एक दायरे में ट्रेडिंग) में है। चार्ट्स के अनुसार, इंडेक्स 24,200 के रेजिस्टेंस लेवल को पार करने के लिए संघर्ष कर रहा है। नीचे की तरफ, 23,800 एक अहम सपोर्ट लेवल है। 24,200 के ऊपर एक मजबूत क्लोजिंग और मजबूती का संकेत दे सकती है, जबकि 24,000 से नीचे गिरना निचले सपोर्ट की ओर ले जा सकता है।
आगे क्या देखें?
आने वाले हफ्तों में, निवेशकों को दो मुख्य बातों पर ध्यान देना चाहिए: डोमेस्टिक खरीदारी की लय बनी रहती है या नहीं, और ग्लोबल मार्केट के संकेत क्या कहते हैं। अगर DIIs इसी रफ्तार से खरीदारी करते रहे, तो बड़ी गिरावट की आशंका कम हो सकती है। लेकिन, अगर मुनाफावसूली मिडकैप से बड़े Nifty 50 शेयरों तक फैलती है, तो इंडेक्स को अपने मौजूदा स्तरों को बनाए रखने में मुश्किल हो सकती है। साथ ही, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Nifty 50 24,200 के ऊपर क्लोजिंग बनाए रख पाता है या नहीं।
