आज शेयर बाज़ार में नरमी का माहौल रहा, जहाँ Nifty 50 लगातार दूसरे दिन गिरकर **24,187** पर बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक तनावों ने निवेशकों की घबराहट बढ़ाई। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती दिखी, और ऑटो कंपनियों के दमदार नतीजों ने बाज़ार को कुछ सहारा दिया।
Detailed Coverage
बाज़ार पर कच्चे तेल और भू-राजनीतिक दबाव का असर
मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में बिकवाली का दबाव बना रहा। Nifty 50 में 50 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,187 पर बंद हुआ। वहीं, BSE Sensex भी 238 अंक लुढ़ककर 77,470 पर आ गया। पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान बाज़ार की चाल सीमित दायरे में रही, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है।
बाज़ार में कमजोरी की मुख्य वजह वैश्विक आर्थिक दबाव है। कच्चे तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जो भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का सबब है। इसके साथ ही, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। इस अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की जारी बिकवाली के कारण लार्ज-कैप शेयरों में ज़्यादा तेज़ी देखने को नहीं मिली।
मिडकैप और ऑटो सेक्टर की मजबूती
मुख्य सूचकांकों में गिरावट के बावजूद, ब्रॉडर मार्केट ने मजबूती दिखाई। Nifty Midcap 100 इंडेक्स में 0.30% की बढ़ोतरी हुई, जबकि Nifty Smallcap 100 में 0.53% का उछाल देखा गया। Nifty 500 में 275 से ज़्यादा शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जो निवेशकों की व्यापक रुचि को दर्शाता है।
ऑटो सेक्टर इस दौरान सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र रहा, जिसका मुख्य कारण कंपनियों के तिमाही नतीज़े रहे। Bajaj Auto ने 46% की उछाल के साथ ₹3,226 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, वहीं TVS Motor का प्रॉफिट 51% बढ़कर ₹1,174 करोड़ पर पहुँच गया। यह मजबूत डिमांड को दर्शाता है, भले ही मैक्रोइकॉनॉमिक चुनौतियां बनी हुई हैं।
मैक्रोइकॉनॉमिक इंडिकेटर्स और भविष्य का संकेत
करेंसी मार्केट में, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 21 पैसे मज़बूत होकर ₹96.23 पर बंद हुआ। इस मज़बूती का मुख्य कारण कैपिटल इनफ्लो का स्थिर रहना और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए गए FCNR (Foreign Currency Non-Resident) फ्लो के आंकड़े रहे। जून महीने में, भारत के कोर इंफ्रास्ट्रक्चर आउटपुट में 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो पिछले पांच महीनों का उच्च स्तर है। यह आंतरिक औद्योगिक गति के स्थिर रहने का संकेत देता है।
भविष्य की बात करें तो, IMF ने कच्चे तेल की कीमतों और मौसमी पैटर्न से जुड़े जोखिमों का हवाला देते हुए FY27 के लिए भारत के GDP ग्रोथ अनुमान को घटाकर 6.4% कर दिया है, हालांकि FY28 के लिए इसे 6.7% तक बढ़ाया है।
निवेशक अब Adani Power, Nestlé India और SRF जैसी कंपनियों के आने वाले तिमाही नतीजों पर नज़र रखेंगे। इसके अलावा, प्राइमरी मार्केट भी सक्रिय है, जिसमें Lohia Corp, Indo-MIM, और Xtranet Technologies के IPOs इस हफ्ते खुलने वाले हैं, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹5,079 करोड़ है। बाज़ार की दिशा काफी हद तक अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के आगामी नीतिगत फैसले पर निर्भर करेगी।
