भारतीय शेयर बाज़ारों में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ दिया। Nifty 50, **0.53%** गिरकर **23,870** पर आ गया, जबकि Sensex **364** अंक नीचे बंद हुआ। निवेशक बढ़ती एनर्जी कॉस्ट और रुपये के प्रदर्शन पर बारीकी से नज़र बनाए हुए हैं।
Detailed Coverage
क्यों गिरी बाज़ार?
भारतीय शेयर बाज़ारों में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बिकवाली का दबाव देखा गया। Nifty 50 इंडेक्स 126.65 अंक गिरकर 23,870 पर बंद हुआ, वहीं BSE Sensex 364 अंक लुढ़ककर 76,391.38 पर आ गया। इस गिरावट ने बाज़ार की कुल मार्केट कैप से ₹3.3 लाख करोड़ घटा दिए, जिससे BSE मार्केट कैप ₹476.7 लाख करोड़ रह गया।
कच्चे तेल का बढ़ता दबाव और इकोनॉमी पर असर
बाज़ार की मौजूदा गिरावट की एक बड़ी वजह Brent क्रूड ऑयल की कीमतों में 3.2% का उछाल है, जो $93.6 प्रति बैरल तक पहुँच गया है। भारत जैसे बड़े एनर्जी इम्पोर्टर देश के लिए, तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं और ट्रेड डेफिसिट (आयात-निर्यात का अंतर) को चौड़ा कर सकती हैं। इसके अलावा, एनर्जी की बढ़ती लागत कॉर्पोरेट मुनाफे पर भी दबाव डाल सकती है, खासकर केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे एनर्जी-इंटेंसिव सेक्टर्स में। रुपये का ₹96.6 प्रति डॉलर के करीब कमजोर होना भी इंपोर्ट की लागत को बढ़ाकर इन चिंताओं को बढ़ा रहा है।
सेक्टरों में बिकवाली और निवेशकों का रवैया
यह बिकवाली ब्रॉड-बेस्ड रही, यानी ज़्यादातर सेक्टर्स प्रभावित हुए। Nifty केमिकल्स और Nifty रियलिटी इंडेक्स में क्रमश: 1.9% और 1.8% की गिरावट दर्ज की गई। Reliance Industries और HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में भी बिकवाली देखी गई, जिसने इंडेक्स पर अच्छा खासा असर डाला।
IndusInd Bank के शेयर में 6% की भारी गिरावट आई, भले ही कंपनी ने जून तिमाही में 72% ज़्यादा मुनाफा दर्ज किया हो। यह गिरावट दर्शाती है कि निवेशक नतीजों के बजाय प्रॉफिट-बुकिंग पर ध्यान दे रहे थे, खासकर रिजल्ट आने से पहले स्टॉक में 7% की तेजी के बाद। यह दिखाता है कि मौजूदा अनिश्चित माहौल में निवेशक मैक्रोइकॉनॉमिक अनिश्चितताओं के बीच स्टॉक की कीमतों को और बढ़ाने की कोशिश करने के बजाय अपने मुनाफे को सुरक्षित करना चाहते हैं।
FPIs की बिकवाली और आगे का नज़रिया
फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ₹2,999 करोड़ की बिकवाली के साथ नेट सेलर्स बने रहे। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने ₹2,947 करोड़ की नेट बाइंग करके कुछ सहारा ज़रूर दिया, लेकिन यह गिरावट की दिशा को मोड़ने के लिए काफी नहीं था। मार्केट ब्रेथ कमजोर बनी रही, जहां 2,600 से ज़्यादा शेयरों में गिरावट आई, जबकि करीब 1,500 शेयर ही बढ़ पाए।
आगे, निवेशक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और FPI फ्लो की दिशा पर नज़र रखेंगे। टेक्निकल तौर पर, Nifty 50 के 23,750 के सपोर्ट लेवल को टेस्ट करने की उम्मीद है। इस स्तर को बनाए रखने में विफलता आगे और गिरावट का संकेत दे सकती है, जबकि रिकवरी के लिए इंडेक्स को 23,980-24,000 की रेंज पार करनी होगी।
