FY26: शेयर बाजार की बदली चाल
फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा। जहां पिछले दो साल से लगातार तेजी बनी हुई थी, वहीं इस बार Nifty 50 इंडेक्स में करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई। FY25 में 5.34% का उछाल मिला था, लेकिन FY26 में तस्वीर बदल गई। अब फोकस सिर्फ बड़ी वैल्यूएशन (Valuations) से हटकर असल अर्निंग्स ग्रोथ (Earnings Growth) पर आ गया है। ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स Nifty 500 में भी 2% की गिरावट दिखी। इस दौरान इंडिया VIX, जो बाजार की वोलेटिलिटी (Volatility) का पैमाना है, 23.3850 और 27.0875 के बीच रहा, जो निवेशकों की घबराहट को दिखाता है।
बाजार गिरे पर कुछ सेक्टर चमके
बाजार में गिरावट के बावजूद, FY26 में कुछ सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया। पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs), खासकर पब्लिक सेक्टर बैंक्स (PSBs), इस साल रिकॉर्ड ₹2 लाख करोड़ के संयुक्त नेट प्रॉफिट के आंकड़े को पार करने की राह पर हैं। इसकी वजह है साफ-सुथरी बैलेंस शीट, 10-12% की क्रेडिट ग्रोथ और सुधरती एसेट क्वालिटी, जिससे ग्रॉस NPA मल्टी-ईयर लो पर आ गए हैं। वहीं, रियल एस्टेट सेक्टर ने भी लगातार ग्रोथ दिखाई। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस सेक्टर में इस साल $12-14 बिलियन का इक्विटी कैपिटल इनफ्लो आ सकता है और यह निवेशकों के लिए अच्छा परफॉर्म करने वाला एसेट बना हुआ है। दूसरी ओर, इंडियन IT सेक्टर ने 6.1% ग्रोथ का अनुमान तो जताया, लेकिन 1-5% की सबड्यूड रेवेन्यू गाइडेंस दी। इसका मुख्य कारण ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता, क्लाइंट्स द्वारा कॉस्ट कटिंग और AI एडॉप्शन है, जिसके चलते यह सेक्टर बाकी बाजार से पिछड़ गया।
मैक्रोइकोनॉमिक दबाव और ग्लोबल अनिश्चितता
FY26 में बाजार के प्रदर्शन पर कई मैक्रोइकोनॉमिक चुनौतियों और ग्लोबल अनिश्चितताओं का असर रहा। फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने बिकवाली जारी रखी और इस फाइनेंशियल ईयर में करीब ₹1.76 ट्रिलियन निकाले। इस आउटफ्लो के चलते मार्च 2026 तक भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 94.05 पर पहुंच गया। मध्य पूर्व में जियोपॉलिटिकल टेंशन और अमेरिका की ट्रेड पॉलिसी में संभावित बदलावों (जैसे टैरिफ) ने भी काफी अनिश्चितता पैदा की और निवेशकों को सतर्क कर दिया। भारत की रियल GDP ग्रोथ FY26 में मजबूत 7.4% रहने का अनुमान था, लेकिन नॉमिनल GDP ग्रोथ 8% तक ही सीमित रही, जिसका कारण रिकॉर्ड लो इन्फ्लेशन था। इसने कॉर्पोरेट रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ को भी प्रभावित किया।
वैल्यूएशन और बाहरी जोखिम चिंता का सबब
FY26 में बाजार ने चुनिंदा मौके दिए, न कि हर तरफा तेजी। वैल्यूएशन ठीक-ठाक थे, लेकिन बहुत ज्यादा डिस्काउंट नहीं मिल रहा था। Nifty 50 करीब 20 गुना अर्निंग्स पर ट्रेड कर रहा था, जो ऐतिहासिक रूप से बहुत सस्ता तो नहीं, पर फेयर माना जा सकता है। इससे पता चलता है कि पिछली रैली के एक्ससेस तो कम हो गए थे, लेकिन अभी भी कई निवेशकों की उम्मीदों में एक रिस्क प्रीमियम बना हुआ था। मुख्य जोखिमों में FPIs की लगातार बिकवाली, जो ऐतिहासिक रूप से लिक्विडिटी और सेंटिमेंट पर दबाव डालती है, और US ट्रेड पॉलिसी व ग्लोबल कॉन्फ्लिक्ट्स की अप्रत्याशितता शामिल थी। IT सेक्टर को जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और तेजी से बढ़ते AI कॉम्पिटीटर्स से 'डुअल डिसरप्शन' का सामना करना पड़ा।
FY27 का आउटलुक: सतर्क आशावाद
आगे FY27 को देखते हुए, एनालिस्ट्स सतर्क आशावाद (Cautious Optimism) जता रहे हैं। उन्हें कॉर्पोरेट अर्निंग्स में सुधार और FY26 में बड़ी समस्या रहे फॉरेन इन्वेस्टर फ्लो की वापसी की उम्मीद है। Nifty अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ग्रोथ के अनुमान FY26-FY28 के लिए 16% कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) तक हैं, जिसमें FY26 के लिए 10% और FY27 के लिए 15% का अनुमान है। भारत की GDP ग्रोथ मजबूत बने रहने की उम्मीद है, जो बाजार की स्थिरता को सपोर्ट करेगी। ऐसे में, मजबूत बैलेंस शीट और भरोसेमंद कैश फ्लो वाली कंपनियां बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं। अमेरिका और EU के साथ फाइनल बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट्स भी मीडियम टर्म में इकोनॉमिक और मार्केट आउटलुक को बूस्ट कर सकते हैं।