भारतीय शेयर बाज़ारों ने लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में भी अपनी तेजी जारी रखी। 18 जून 2026 को Nifty 50 और BSE Sensex दोनों में बढ़त दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और भारतीय रुपये की मजबूती ने बाज़ार के सेंटिमेंट को काफी बढ़ावा दिया।
बाज़ार में लगातार 5वें दिन क्यों आई तेजी?
भारतीय शेयर बाज़ारों में गुरुवार को एक बार फिर खरीदारी का माहौल रहा। BSE Sensex 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 50 इंडेक्स 82.30 अंक यानी 0.34% की बढ़त के साथ 24,168 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले पांच दिनों में Sensex 2,800 अंकों से ज़्यादा और Nifty 760 अंकों से ज़्यादा की तेजी दिखा चुका है। बाज़ार में सकारात्मकता बनी रही, भले ही अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों पर रुख को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं।
मैक्रो इकोनॉमिक्स का असर
इस तेज़ी के पीछे प्रमुख वजह मैक्रो इकोनॉमिक इंडिकेटर्स में आया सकारात्मक बदलाव रहा। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 2.23% गिरकर $77.78 प्रति बैरल पर आ गईं। भारत जैसे देश के लिए यह बड़ी बात है क्योंकि हम तेल का बड़ा आयात (import) करते हैं। कच्चे तेल के दाम गिरने से महंगाई का दबाव कम होता है और देश का आयात बिल भी नियंत्रित रहता है। इसके अलावा, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे मज़बूत होकर 94.36 पर बंद हुआ। मज़बूत रुपया बाज़ार के लिए अच्छा संकेत माना जाता है क्योंकि इससे कच्चे माल और ऊर्जा की लागत कम रहती है। साथ ही, इंडिया VIX (वोलेटिलिटी इंडेक्स) में भी लगभग 4% की गिरावट आई और यह 12.67 पर आ गया, जो बताता है कि भू-राजनीतिक (geopolitical) घटनाओं, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद ट्रेडर्स अधिक सहज महसूस कर रहे हैं।
किस सेक्टर में कैसा रहा प्रदर्शन?
बाज़ार की इस चाल का नेतृत्व डोमेस्टिक-फोकस्ड और रेट-सेंसिटिव सेक्टर्स ने किया। एविएशन यानी एयरलाइन कंपनियों के शेयरों में उछाल देखा गया। IndiGo के शेयर 2.78% चढ़ गए, क्योंकि ईंधन की कम लागत से इस सेक्टर के लिए सेंटिमेंट बेहतर हुआ। बैंकिंग शेयरों में भी तेज़ी रही, HDFC Bank और State Bank of India क्रमशः 1.74% और 1.56% की बढ़त के साथ बंद हुए। हेल्थकेयर सेक्टर में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं, दूसरी ओर, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर बाज़ार पर दबाव बनाता नज़र आया। निवेशकों को चिंता है कि अमेरिकी ब्याज दरों में लगातार बढ़त का असर उन टेक कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनकी ज़्यादातर कमाई अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से होती है। एक बड़ी IT कंपनी के शेयर 2.62% गिर गए, जो Nifty के टॉप लूज़र रहे। निवेशकों ने ग्लोबल ग्रोथ में मंदी और इन कंपनियों के लिए बढ़ी हुई उधारी लागत के जोखिमों का फिर से आकलन किया।
आगे क्या देखना होगा?
हालांकि मौजूदा तेज़ी निवेशकों के ऑप्टिमिज़्म को दर्शाती है, लेकिन बाज़ार के प्रतिभागी ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स को लेकर भविष्य के घटनाक्रमों पर नज़र रखेंगे। भले ही घरेलू बाज़ार ने अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के हॉकिश संकेतों को नज़रअंदाज़ किया है, लेकिन दुनिया भर में लगातार ऊंची उधारी लागत चर्चा का विषय बनी हुई है। निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का यह ट्रेंड जारी रहता है या नहीं, क्योंकि इससे आने वाली तिमाहियों में महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, IT सेक्टर का प्रदर्शन भी बड़े इंडेक्स की तुलना में महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह संकेत दे सकता है कि ग्लोबल आर्थिक परिस्थितियां प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के अर्निंग आउटलुक को कैसे प्रभावित कर रही हैं। फोकस इस बात पर रहेगा कि ये मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स घरेलू बॉन्ड यील्ड्स और बाज़ार की लिक्विडिटी को कैसे प्रभावित करते हैं।
