Nifty 50: सपाट क्लोजिंग, रुपया पहुंचा एक महीने के निचले स्तर पर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Nifty 50: सपाट क्लोजिंग, रुपया पहुंचा एक महीने के निचले स्तर पर

बुधवार को Nifty 50 इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ, 24,078 के स्तर पर। कंपनियों के अच्छे नतीजों के बावजूद, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर रुपये का असर बाजार पर दिखा। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले एक महीने के सबसे निचले स्तर पर चला गया।

बाजार में दिखी नरमी, सपाट बंद हुआ Nifty 50

भारतीय शेयर बाजारों में बुधवार को सतर्कता का माहौल रहा। बेंचमार्क Nifty 50 इंडेक्स ने दिन का कारोबार 0.11% की मामूली बढ़त के साथ 24,078.50 पर बंद किया। शुरुआत में बाजार में लगभग 0.7% की तेजी देखी गई थी, लेकिन दोपहर होते-होते यह रफ्तार धीमी पड़ गई। निवेशकों की प्रतिक्रिया ग्लोबल एनर्जी सप्लाई की चिंताओं और घरेलू मुद्रा में आई कमजोरी पर केंद्रित रही।

सेक्टरों में दिखी मिली-जुली चाल

सेक्टरों के प्रदर्शन में भी भिन्नता देखने को मिली। सीमेंट, PSU बैंक और केमिकल कंपनियों में 0.9% से लेकर 1.8% तक की बढ़त दर्ज की गई। इन सेक्टर्स को अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों से कुछ राहत मिली, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावना कम नजर आई। हालांकि, मेटल और आईटी सेक्टरों में नरमी ने इस बढ़त को सीमित कर दिया। मेटल शेयरों में 1.1% की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण चीन के तिमाही GDP ग्रोथ के निराशाजनक आंकड़े रहे, जो 4.3% पर आए। यह चीन के प्रॉपर्टी सेक्टर में सुस्त मांग के जोखिमों को उजागर करता है, जो ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों को प्रभावित करती है।

रुपये पर दबाव और एनर्जी की बढ़ती कीमतें

भारतीय रुपये पर जबरदस्त दबाव देखा गया और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹96.20 के पार चला गया, जो 21 मई के बाद का सबसे निचला स्तर है। जून में अपने उच्चतम स्तर से यह 2.4% कमजोर हुआ है। रुपये की इस कमजोरी का सीधा संबंध कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से है, जो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर खतरों के कारण $85 प्रति बैरल के ऊपर बने हुए हैं। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, ऐसे में एनर्जी की ऊंची कीमतें देश की डॉलर की मांग को बढ़ाती हैं, जिससे रुपये में गिरावट आती है और आयात पर निर्भर व्यवसायों पर दबाव बढ़ता है।

नतीजों का असर और कॉरपोरेट डेवलपमेंट

अलग-अलग शेयरों का प्रदर्शन तिमाही नतीजों से काफी प्रभावित हुआ। L&T Technology Services (LTTS) के शेयरों में अच्छी प्रतिक्रिया देखी गई, क्योंकि कंपनी ने 13% का प्रॉफिट ग्रोथ और 200-बेसिस पॉइंट का प्रॉफिट मार्जिन विस्तार दर्ज किया। वहीं, Tata Elxsi के शेयर 4% गिरे, जबकि कंपनी ने साल-दर-साल 14.5% का रेवेन्यू ग्रोथ दिखाया था। यह दिखाता है कि बाजार में कंपनियों को अपने स्टॉक प्राइस को बनाए रखने के लिए उम्मीदों से बढ़कर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। इसके अलावा, पतंजलि फूड्स के शेयर लगातार तीसरे दिन बिकवाली के दबाव में रहे, क्योंकि एडिबल ऑयल की कीमतों में अस्थिरता कंपनी के ऑपरेटिंग आउटलुक को प्रभावित कर रही है।

निवेशक अब आगामी मैक्रोइकोनॉमिक इंडिकेटर्स और प्रमुख कॉरपोरेट नतीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। गुरुवार को अमेरिकी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) डेटा और फेडरल रिजर्व के चेयर के कांग्रेस में बयान ग्लोबल सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। घरेलू मोर्चे पर, Wipro, Tech Mahindra, BHEL, Jio Financial Services और Paytm जैसी बड़ी कंपनियों के नतीजे मांग की स्थिति का संकेत देंगे। सप्ताहांत तक, बाजार HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे बड़े प्राइवेट बैंकों के नतीजों का इंतजार करेगा।

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