भारतीय शेयर बाजार में लगातार 5 दिनों की गिरावट के बाद आज थोड़ी राहत मिली है। Nifty 50 इंडेक्स **23,767** के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि, **$100** प्रति बैरल के पार कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
Detailed Coverage
बाजार में क्यों आई गिरावट?
पिछले कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी था। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन Nifty 50 इंडेक्स 23,767.45 पर बंद हुआ, जो 12 जून 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर है। पूरे हफ्ते में इंडेक्स ने 2.33% की गिरावट दर्ज की, जो बाजार में फैली व्यापक सतर्कता को दर्शाता है।
कच्चे तेल का बढ़ता दाम और ग्लोबल टेंशन
इस गिरावट की मुख्य वजह ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों का $100 प्रति बैरल के पार जाना है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई चेन में रुकावट का डर पैदा हो गया है, खासकर लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते। कच्चे तेल के महंगे होने से भारत जैसी तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है और राजकोषीय घाटा भी बिगड़ सकता है।
आर्थिक आंकड़ों और ट्रेड टेंशन का असर
घरेलू आर्थिक आंकड़ों ने भी निवेशकों की घबराहट को बढ़ाया है। जुलाई के लिए HSBC Flash Composite Purchasing Managers' Index (PMI) गिरकर 54.3 पर आ गया, जो जून के 57.1 से कम है। यह पिछले चार सालों में भारत की प्राइवेट सेक्टर की गतिविधि में सबसे धीमी बढ़ोतरी को दिखाता है। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय आयात पर 10% का अतिरिक्त टैरिफ लगाने से एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड इंडस्ट्रीज पर असर पड़ सकता है।
विदेशी और घरेलू निवेशकों की चाल
इस हफ्ते विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से ₹3,289.31 करोड़ निकाले, जिससे बिकवाली का दबाव बना रहा। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹3,184.03 करोड़ का निवेश कर इस दबाव को कुछ हद तक कम किया। प्राइवेट बैंक और रियल एस्टेट सेक्टर 4.5% से ज्यादा गिरे, जबकि ऑटो और मेटल सेक्टर में भी बिकवाली देखने को मिली। वहीं, FMCG शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया और करीब 1% की बढ़त दर्ज की।
आगे क्या?
आगे चलकर बाजार की चाल सेंट्रल बैंकों के फैसलों और घरेलू आंकड़ों पर निर्भर करेगी। वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग और बैंक ऑफ जापान के ब्याज दरों पर फैसले पर सबकी नजरें होंगी। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.71% पर पहुंच गया है, जो विदेशी निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की ओर आकर्षित कर सकता है। घरेलू मोर्चे पर, औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़े और Q1FY27 की कमाई के नतीजे बाजार की दिशा तय करेंगे।
