मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई तेजी ने भारतीय शेयर बाज़ार को कंसोलिडेशन यानी दायरे में रहने पर मजबूर कर दिया है। निवेशक निफ्टी 50 के **24,000** के सपोर्ट लेवल पर कड़ी नजर रख रहे हैं। वहीं, बैंक निफ्टी **58,000** के ऊपर मजबूती दिखा रहा है। हालांकि, तेल की ऊंची कीमतें भारत के व्यापार घाटे (Trade Balance) और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकती हैं।
कंसोलिडेशन के पीछे की वजह
इस हफ्ते भारतीय शेयर बाज़ार एक कंसोलिडेशन फेज में प्रवेश कर गया है। निवेशक मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के असर का आकलन कर रहे हैं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर दबाव डालती हैं और एविएशन (Aviation), पेंट्स (Paints) और लॉजिस्टिक्स (Logistics) जैसे ऊर्जा पर भारी निर्भर क्षेत्रों के प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margins) को कम कर सकती हैं।
निफ्टी 50 और ब्रॉडर मार्केट का हाल
निफ्टी 50 इंडेक्स फिलहाल 24,000 के लेवल के पास सपोर्ट तलाश रहा है। मार्केट डेटा के अनुसार, यह लेवल इंडेक्स फ्यूचर्स में हाल की एक्टिविटी के दम पर एक मजबूत बेस बन गया है। उम्मीद है कि यह इंडेक्स नियर-टर्म में 23,800 और 24,300 के ट्रेडिंग बैंड में रहेगा। आईटी सेक्टर (IT Sector) में रिकवरी के संकेत दिखे हैं, वहीं निफ्टी मिडकैप (Nifty Midcap) और निफ्टी स्मॉलकैप (Nifty Smallcap) जैसे ब्रॉडर मार्केट इंडेक्स भी लगातार मजबूती के लिए देखे जा रहे हैं। 24,300 के रेजिस्टेंस लेवल से ऊपर एक स्थायी बढ़त ही इंडेक्स को 24,500 के आसपास के ऊंचे स्तरों तक ले जा सकती है।
बैंक निफ्टी का प्रदर्शन
बैंक निफ्टी 58,000 के मार्क के ऊपर अपनी मजबूती बनाए हुए है। यह इंडेक्स फिलहाल 57,500 से 58,700 की रेंज में ट्रेड कर रहा है। बैंकिंग इंडेक्स में यह स्थिरता ज्यादातर पीएसयू बैंक स्टॉक्स (PSU Bank Stocks) में नई खरीदारी और 57,000 से 57,500 स्ट्राइक प्राइस पर हुए बड़े पुट ऑप्शन एक्टिविटी (Put Option Activity) के कारण है, जो इंडेक्स के लिए फ्लोर का काम कर रहे हैं। बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 59,000 पर है।
जोखिम और ध्यान रखने योग्य बातें
निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता (Volatility) मुख्य जोखिम बनी हुई है। तेल की लागत में लगातार वृद्धि महंगाई (Inflationary Pressures) को बढ़ा सकती है, जिसका असर घरेलू अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट कमाई पर पड़ेगा। हालांकि इंडिया VIX, MACD और RSI जैसे टेक्निकल इंडिकेटर्स (Technical Indicators) मौजूदा ट्रेंड को स्थिर बता रहे हैं, लेकिन किसी भी भू-राजनीतिक संघर्ष (Geopolitical Conflict) के बढ़ने से बाजार की अस्थिरता बढ़ सकती है और प्रमुख सपोर्ट लेवल टूट सकते हैं। आने वाले सत्रों में निफ्टी 50 के लिए 24,000 और बैंक निफ्टी के लिए 57,500 के सपोर्ट जोन को बनाए रखने की इंडेक्स की क्षमता सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर होगी।
