Nifty 50: 26,000 की फाइट! एक्सपायरी के पास बाज़ार में उथल-पुथल, नतीजों में दिखी बड़ी भिन्नता

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
Nifty 50: 26,000 की फाइट! एक्सपायरी के पास बाज़ार में उथल-पुथल, नतीजों में दिखी बड़ी भिन्नता
Overview

जैसे-जैसे फरवरी की मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी (Derivatives Expiry) नज़दीक आ रही है, Nifty 50 इंडेक्स **26,000** के अहम साइकोलॉजिकल स्तर को पार करने की कोशिश कर रहा है। बाज़ार में इस वक्त उथल-पुथल तेज़ है, जहाँ विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का फ्लो फिर से शुरू हुआ है, लेकिन IT जैसे सेक्टर्स में कमजोरी और फाइनेंसियल व PSU बैंकों जैसे सेक्टर्स में मजबूती साफ दिख रही है।

एक्सपायरी डे का इम्तिहान

11 फरवरी 2026 को Nifty 50 इंडेक्स 25,935.15 पर बंद हुआ, जो कि 26,000 के महत्वपूर्ण साइकोलॉजिकल बैरियर के काफी करीब है। ऑप्शन एक्सपायरी (Option Expiry) के कारण बाज़ार में इस वक्त वोलैटिलिटी (Volatility) बनी हुई है। तकनीकी तौर पर देखें तो इंडेक्स को 26,000 के स्तर पर इमीडिएट रेजिस्टेंस (Immediate Resistance) मिल रहा है, जबकि 25,880 और 25,500 के लेवल सपोर्ट (Support) का काम कर सकते हैं। एक्सपायरी के दिन अक्सर पोजीशन रोल्ड ओवर (Position Rolled Over) होने से चाल में तेजी या गिरावट देखी जाती है।

नतीजों का मिला-जुला असर

क्वार्टर 3 (Q3) के नतीजों का सीजन जारी है और इस बार कंपनियों के परफॉरमेंस में बड़ा अंतर साफ दिख रहा है। खासकर, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर दबाव में है, जहाँ प्रॉफिट-टेकिंग (Profit-taking) और मार्जिन पर दबाव की चिंताओं के चलते बिकवाली हावी है। वहीं, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) बैंक, रियल एस्टेट और कंज्यूमर ड्यूरेबल जैसे सेक्टर्स मजबूती दिखा रहे हैं, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत है।

मैक्रो इकोनॉमिक्स और सेक्टर रोटेशन

बाज़ार को सपोर्ट देने वाले कुछ अहम मैक्रो इकोनॉमिक (Macroeconomic) फैक्टर भी हैं। हालिया इंडिया-यूएस ट्रेड डील (India-US Trade Deal) एक्सपोर्ट्स के लिए अच्छी साबित हो सकती है। इसके अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है, जो इकोनॉमिक ग्रोथ को सपोर्ट करेगा। दिसंबर 2025 में इन्फ्लेशन (Inflation) यानी महंगाई दर 1.33% पर कंट्रोल में रही। फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने ₹8,100 करोड़ से ज़्यादा का नेट इनफ्लो (Net Inflow) किया है, जबकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) का फ्लो भी लगातार बना हुआ है। Nifty 50 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो करीब 22.7-22.8 के आसपास है, जिसे फेयर वैल्यूएशन (Fair Valuation) माना जा रहा है।

जोखिम और आगे की राह

हालांकि, बाज़ार के लिए कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। IT सेक्टर में जारी कमजोरी अगर बढ़ी तो यह पूरे मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकती है। बजट में डेरिवेटिव्स पर बढ़ी हुई टैक्सेशन (Taxation) भी ट्रेडिंग वॉल्यूम पर असर डाल सकती है। वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत और भू-राजनीतिक (Geopolitical) डेवलपमेंट भी बाज़ार की चाल तय करेंगे। आने वाले दिनों में Q3 नतीजों और महंगाई के आंकड़ों पर सबकी नज़र रहेगी। एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि बाज़ार पॉजिटिव तो दिख रहा है, लेकिन सतर्कता के साथ सेलेक्टिव स्टॉक पिकिंग (Selective Stock Picking) की ज़रूरत होगी।

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