भारतीय शेयर बाज़ारों ने हफ़्ते का अंत बढ़त के साथ किया। निफ्टी 50 इंडेक्स **0.52%** चढ़कर **24,334.30** के स्तर पर बंद हुआ। IT सेक्टर के शानदार प्रदर्शन और सरकार की नई मैन्युफैक्चरिंग पहलों ने बाज़ार को सहारा दिया। हालांकि, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में **16%** की तेज़ी और विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दीं। वैश्विक अनिश्चितता के बीच रुपया भी डॉलर के मुकाबले **96.28** पर कमजोर हुआ।
IT सेक्टर की मजबूती और सरकारी पहलों ने खींचा ध्यान
हफ़्ते के आख़िरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाज़ारों में तेज़ी देखने को मिली। निफ्टी 50 इंडेक्स 0.52% की बढ़त के साथ 24,334.30 के स्तर पर बंद हुआ। इस तेज़ी का मुख्य कारण रहा इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर का मज़बूत प्रदर्शन, जिसके चलते निफ्टी IT इंडेक्स में हफ़्ते भर में 4.3% का उछाल आया। इसके अलावा, केंद्रीय कैबिनेट द्वारा लगभग ₹1.9 लाख करोड़ की नई मैन्युफैक्चरिंग पहलों को मंज़ूरी मिलने से भी निवेशकों का सेंटिमेंट मज़बूत हुआ, जो घरेलू औद्योगिक विकास को गति देने की सरकारी मंशा का संकेत देता है।
वैश्विक ऊर्जा संकट और करेंसी का दबाव
घरेलू बाज़ार में सकारात्मकता के बावजूद, वैश्विक स्तर पर बाज़ार को बाहरी दबावों का सामना करना पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते कमोडिटी की कीमतों में भारी उछाल आया, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें लगभग 16% बढ़कर $88.10 प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों से भारत में महंगाई बढ़ने की चिंताएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक देश है। इस अनिश्चितता के चलते, बाज़ार की अस्थिरता को मापने वाले इंडिया VIX (India VIX) इंडेक्स में 7.3% की तेज़ी देखी गई, जो निवेशकों के बीच बढ़ती सावधानी को दर्शाता है।
रुपये में गिरावट और FIIs की बिकवाली
भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले दबाव में बना रहा और लगातार चौथे हफ़्ते गिरावट दर्ज की गई, जो 96.28 के स्तर पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से बिकवाली भी जारी रही, जिन्होंने हफ़्ते भर में इक्विटी बाज़ार से ₹9,119.76 करोड़ की निकासी की। लगातार FII आउटफ्लो को बाज़ार में लिक्विडिटी की स्थिति पर नज़र रखने का एक अहम संकेत माना जाता है।
सेक्टरों में मिली-जुली चाल
अलग-अलग सेक्टर्स में प्रदर्शन मिला-जुला रहा। जहां IT सेक्टर ने मज़बूती दिखाई, वहीं अन्य क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। कैपिटल मार्केट से जुड़े स्टॉक्स में लगभग 3% की गिरावट आई, जो सबसे कमज़ोर रहे। मेटल और रियलिटी सेक्टर में भी दबाव देखने को मिला, दोनों में 2% की गिरावट आई। हालांकि बड़े इंडेक्स में तेज़ी रही, लेकिन ब्रॉडर मार्केट में दबाव के संकेत मिले, क्योंकि निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 1% की गिरावट आई। यह दर्शाता है कि बड़े IT स्टॉक्स ने भले ही स्थिरता प्रदान की हो, लेकिन छोटे कंपनियों को अस्थिर वैश्विक माहौल में अपनी पकड़ बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ा।
आगे चलकर, बाज़ार पर मौजूदा कॉर्पोरेट अर्निंग्स सीज़न का प्रभाव बना रहेगा, क्योंकि निवेशक विभिन्न सेक्टर्स के स्वास्थ्य का आकलन करेंगे। बाज़ार सहभागियों के लिए मुख्य बात यह होगी कि क्या घरेलू अर्निंग्स ग्रोथ, बढ़ी हुई ऊर्जा लागत और FII फ्लो में संभावित अस्थिरता के दोहरे प्रभाव का सामना कर पाती है। इसके अलावा, अमेरिका-ईरान की स्थिति का घटनाक्रम, जो निकट अवधि में करेंसी की स्थिरता और कमोडिटी की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, एक महत्वपूर्ण कारक बना रहेगा।
