Nifty 50: 5 महीने के संघर्ष के बाद 24,000 के पार जाने की उम्मीद, अगस्त एक्सपायरी पर नजर

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AuthorMehul Desai|Published at:
Nifty 50: 5 महीने के संघर्ष के बाद 24,000 के पार जाने की उम्मीद, अगस्त एक्सपायरी पर नजर

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि Nifty 50 अगस्त एक्सपायरी तक 24,000 के स्तर के पार बंद हो सकता है, जिससे पांच महीने का एक ट्रेंड टूट सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और तेल की कीमतों में नरमी इस उम्मीद के पीछे मुख्य कारण हैं।

5 महीने के संघर्ष के बाद Nifty 50 में तेजी की उम्मीद?

Nifty 50 अपने अगस्त एक्सपायरी की ओर बढ़ रहा है और उम्मीद है कि यह 24,000 के साइकोलॉजिकल लेवल को पार कर जाएगा। पिछले पांच महीनों से, इंडेक्स मासिक सेटलमेंट के दौरान इस लेवल को पार करने के लिए संघर्ष कर रहा था। 24,000 कॉल ऑप्शंस में भारी बिकवाली इस मुश्किल का मुख्य कारण रही है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और तेल की कीमतों में नरमी

इस संभावित बदलाव का एक बड़ा कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के व्यवहार में आया बदलाव है। पिछले महीने जहां विदेशी निवेशकों ने करीब ₹53,958 करोड़ की बिकवाली की थी, वहीं अगस्त में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ ₹2,126 करोड़ रह गया है। बिकवाली के दबाव में कमी से इंडेक्स को ऊपर जाने का मौका मिलता है, खासकर अगर शॉर्ट कवरिंग (Short Covering) देखने को मिले। शॉर्ट कवरिंग तब होती है जब बाजार के खिलाफ दांव लगाने वाले ट्रेडर्स अपनी पोजीशन को बंद करने के लिए शेयर खरीदते हैं, जिससे कीमतों में और तेजी आ सकती है।

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों का असर भी भारतीय बाजार पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत तेल का एक बड़ा आयातक देश है। जुलाई में भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़ी थीं। हालांकि, हाल ही में तनाव में कमी और कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं से तेल की कीमतों को स्थिर करने में मदद मिली है। जब तेल की कीमतें स्थिर या कम होती हैं, तो इससे भारत के ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) और महंगाई (Inflation) पर सकारात्मक असर पड़ता है, जिससे इक्विटी मार्केट के लिए एक स्थिर माहौल बनता है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

आगामी 25 अगस्त की एक्सपायरी के दौरान Nifty 50 का प्रदर्शन देखने लायक होगा। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि FPIs की बिकवाली में कमी एक स्थायी ट्रेंड है या एक्सपायरी के करीब आते ही अस्थिरता (Volatility) लौट आती है। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव या पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक स्थिति में कोई भी बदलाव बाजार की धारणा को तेजी से बदल सकता है। हालांकि मौजूदा स्थिति 24,000 के पार एक संभावित ब्रेकआउट का संकेत दे रही है, लेकिन बाजार सहभागियों को यह याद रखना चाहिए कि एक्सपायरी के दौरान ट्रेडर्स अपनी पोजीशन को एडजस्ट करते हैं, जिससे यह समय अक्सर अधिक अस्थिर होता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.