Expiry का माहौल और मार्केट की चाल
Expiry (Expiry) के नजदीक आते ही Nifty 50 इंडेक्स 26,000 के महत्वपूर्ण साइकोलॉजिकल लेवल को छूने की कोशिश कर रहा है। यह वो समय होता है जब ट्रेडर्स अपनी पोजीशन एडजस्ट करते हैं, जिससे बाजार में हलचल बढ़ जाती है। 9 फरवरी 2026 को Nifty 50 ने 25,867.30 पर क्लोजिंग दी, और दिन के दौरान यह 25,780.90 से 25,922.25 के लेवल के बीच रहा। ब्रॉडर मार्केट (Broader Market) यानी मिड-कैप (Mid-cap) और स्मॉल-कैप (Small-cap) सेगमेंट्स ने भी फ्रंटलाइन इंडेक्स से बेहतर परफॉरमेंस दिखाई, जहां इनमें क्रमशः 1.6% और 2.6% की उछाल देखी गई।
इस चौतरफा तेजी के बीच, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर में काफी कमजोरी नज़र आई, जहाँ प्रॉफिट-बुकिंग (Profit-booking) और ग्लोबल टेक मार्केट (Global Tech Market) में मार्जिन प्रेशर (Margin Pressure) की चिंताओं के कारण गिरावट दर्ज की गई। वहीं, PSU बैंक्स (PSU Banks), रियलटी (Realty) और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Consumer Durables) जैसे सेक्टर्स ने शानदार परफॉरमेंस दिखाई, जो मार्केट में एक बायफर्केटेड सेंटीमेंट (Bifurcated Sentiment) की ओर इशारा कर रहा है।
मैक्रोइकॉनॉमिक सपोर्ट और RBI का रुख
बाजार के सेंटीमेंट को इंडिया-यूएस ट्रेड डील (India-US Trade Deal) की ख़बरों से काफी बल मिला है, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स (Exporters) को फायदा होने और बिजनेस एनवायरनमेंट (Business Environment) के स्टेबल होने की उम्मीद है। इस पॉजिटिविटी को मैक्रोइकॉनॉमिक (Macroeconomic) मोर्चे पर भी सहारा मिला है। RBI ने फरवरी 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग (Monetary Policy Meeting) में पॉलिसी रेपो रेट (Policy Repo Rate) को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा है। RBI के इस फैसले और न्यूट्रल स्टान्स (Neutral Stance) से इनफ्लेशन (Inflation) कंट्रोल में होने और इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) को सपोर्ट करने का भरोसा झलकता है, जिसके फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) के लिए 7.4% रहने का अनुमान है। दिसंबर 2025 में CPI इनफ्लेशन 1.33% पर था, और FY26 के लिए अनुमान 2.1% है, जो प्राइस स्टेबिलिटी (Price Stability) के अनुकूल माहौल को दर्शाता है।
वैल्यूएशन और फॉरेन इनफ्लो
Nifty 50 इंडेक्स फिलहाल लगभग 22.8 के प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जिसे मार्केट एनालिस्ट्स (Market Analysts) 'फेयरली वैल्यूड' (Fairly Valued) रेंज में मानते हैं। यह बताता है कि मौजूदा मार्केट लेवल अंडरलाइंग अर्निंग्स (Underlying Earnings) द्वारा सपोर्टेड हैं। हालिया तेजी का एक बड़ा कारण फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की वापसी रही है, जो फरवरी 2026 में नेट बायर्स (Net Buyers) बनकर आए और उन्होंने इंडियन इक्विटीज (Indian Equities) में ₹8,100 करोड़ से ज्यादा का इनफ्लो किया। यह कई महीनों के आउटफ्लो (Outflow) के बाद एक बड़ा रिवर्सल है और भारत की इकोनॉमिक प्रोस्पेक्ट्स (Economic Prospects) में फिर से भरोसा जगाता है, जिसका मुख्य कारण ग्लोबल रिस्क एपेटाइट (Global Risk Appetite) में सुधार और इंडिया-यूएस ट्रेड डील है।
गिरावट की आशंका: सस्टेनेबिलिटी और सेक्टरल डायवर्जेंस
26,000 की ओर बढ़ने और पॉजिटिव FPI फ्लोज़ के बावजूद, इस रैली की सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) पर सवाल बने हुए हैं। IT सेक्टर का अहम वेटेज (Weightage) होने के बावजूद उसका कमजोर परफॉरमेंस मार्केट में ब्रॉड पार्टिसिपेशन (Broad Participation) पर चिंता खड़ी करता है। एनालिस्ट्स Nifty 50 के लिए 26,000–26,300 के ज़ोन में रेजिस्टेंस (Resistance) देख रहे हैं, जबकि इमीडिएट सपोर्ट (Immediate Support) 25,800 के आसपास रहने की उम्मीद है। फाइनेंशियल सर्विसेज (Financial Services) पर इंडेक्स की निर्भरता, जिसका Nifty 50 में 36.6% वेटेज है, एक रिस्क फैक्टर हो सकती है अगर यह डोमिनेंट सेक्टर किसी हेडविंड (Headwind) का सामना करता है। मौजूदा रैली का एक बड़ा हिस्सा Expiry-driven ट्रेड्स (Expiry-driven Trades) से प्रभावित हो सकता है, और सेटलमेंट पीरियड (Settlement Period) के बाद मोमेंटम (Momentum) बनाए रखने में विफलता प्रॉफिट-बुकिंग का कारण बन सकती है।
आगे की राह
Nifty 50 के लिए इमीडिएट आउटलुक (Immediate Outlook) सतर्कता के साथ ऑप्टिमिस्टिक (Cautiously Optimistic) बना हुआ है, जो FPI इनफ्लोज़ (FPI Inflows) के जारी रहने और प्रमुख सेक्टर्स की अपवर्ड ट्रैजेक्टरी (Upward Trajectory) को बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा। Expiry-driven मोमेंटम इंडेक्स को ऊपर धकेल रहा है, लेकिन एनालिस्ट्स 26,000 के लेवल से आगे मार्केट की असली मजबूती का अंदाजा लगाने के लिए कॉर्पोरेट अर्निंग्स (Corporate Earnings) और ब्रॉडर इकोनॉमिक इंडिकेटर्स (Broader Economic Indicators) पर करीबी नज़र रखेंगे। लगातार बाइंग इंटरेस्ट (Buying Interest) और ब्रॉड-बेस्ड सेक्टोरल पार्टिसिपेशन (Broad-based Sectoral Participation) इंडेक्स के लिए अपने गेन्स को कंसॉलिडेट (Consolidate) करने और आगे की बढ़त को एक्सप्लोर (Explore) करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।