New Wage Code: अब हर महीने की 7 तारीख को मिलेगा वेतन, तुरंत मिलेगा हिसाब-किताब!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
New Wage Code: अब हर महीने की 7 तारीख को मिलेगा वेतन, तुरंत मिलेगा हिसाब-किताब!

भारत के 'कोड ऑन वेजेज 2019' ने सैलरी पेमेंट के नियमों को बदला है। अब हर महीने की सातवीं तारीख तक सैलरी देनी होगी। साथ ही, नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों का फाइनल पेमेंट भी दो दिन के अंदर करना होगा। ये नियम सभी कर्मचारियों पर लागू होंगे, चाहे उनकी सैलरी कितनी भी हो।

Detailed Coverage

सैलरी पेमेंट की नई समय-सीमा

मोदी सरकार ने 'कोड ऑन वेजेज 2019' को लागू कर दिया है, जिससे कंपनियों के लिए सैलरी और बोनस के नियम पूरी तरह बदल गए हैं। इसने चार पुराने कानूनों को मिलाकर एक नया ढांचा तैयार किया है।

नए नियमों के तहत, कंपनियों को हर महीने की सैलरी अगले महीने की 7 तारीख तक हर हाल में देनी होगी। इससे पहले कंपनियों को थोड़ी फ्लेक्सिबिलिटी मिलती थी, लेकिन अब उन्हें पे-रोल के लिए लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

सिर्फ यही नहीं, रोज दिहाड़ी पर काम करने वालों को शिफ्ट खत्म होते ही पेमेंट मिल जाएगा। वहीं, हफ्ते या पखवाड़े के हिसाब से काम करने वालों को भी उनके काम के साइकल के खत्म होने के 2 वर्किंग डेज के अंदर पेमेंट करना होगा।

नौकरी छोड़ने वालों का हिसाब-किताब

कॉर्पोरेट HR के लिए एक बड़ा बदलाव यह है कि अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, रिजाइन करता है, या उसे निकाला जाता है, तो उसका सारा बकाया पैसा (फाइनल ड्यूज) उसके जाने के 2 वर्किंग डेज के अंदर चुकाना होगा। यह कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि इससे उनका सेटलमेंट प्रोसेस तेज करना पड़ेगा।

सबके लिए एक समान नियम

पहले के कानूनों के उलट, जो कुछ खास सैलरी लिमिट वाले कर्मचारियों पर ही लागू होते थे, यह नया कोड सभी कर्मचारियों पर एक समान रूप से लागू होगा। इसका मतलब है कि अब हर कर्मचारी, चाहे उसकी इनकम कितनी भी हो, उसे सैलरी में गलत कटौती या देरी से मिलने वाले पेमेंट से सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, अब कंपनी को सैलरी स्लिप इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भी देनी होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

सरकारी निगरानी

इन नियमों का पालन करवाने के लिए सरकार इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर्स नियुक्त करेगी। कर्मचारी भी अपनी बकाया सैलरी या गलत कटौती के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकेंगे। निवेशकों को यह देखना होगा कि इन नए नियमों से कंपनियों के ऑपरेशनल कॉस्ट पर कितना असर पड़ता है, खासकर उन कंपनियों पर जिनके पास बड़ी और बिखरी हुई वर्कफोर्स है। हालांकि, इन नियमों को लागू करने की अंतिम तारीखें केंद्र और राज्य सरकारों की नोटिफिकेशन पर निर्भर करेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.