भारत में अब नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को उनके कमाए हुए सारे पैसे सिर्फ 2 वर्किंग डेज में मिल जाएंगे। सरकार के नए लेबर कोड (Labour Codes) के तहत यह बड़ा बदलाव किया गया है, जिसका मकसद कर्मचारियों को फाइनल ड्यूज (Final Dues) के लिए लंबा इंतजार नहीं करवाना है।
Detailed Coverage
नौकरी छोड़ने पर तुरंत मिलेगा हिसाब!
अब भारत के सभी कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के बाद अपने पूरे हक का पैसा जल्द मिलेगा। नए लेबर कोड (Labour Codes) के नियमों के मुताबिक, कंपनियों के लिए यह ज़रूरी होगा कि वे किसी भी कर्मचारी को उसके काम के आखिरी दिन से 2 वर्किंग डेज के भीतर पूरी सैलरी का भुगतान कर दें। यह नियम तब लागू होगा, जब कर्मचारी खुद रिजाइन करे, उसे निकाला जाए, या कंपनी बंद हो जाए।
यह बदलाव भारतीय कॉर्पोरेट जगत की एक आम समस्या को दूर करेगा, जहाँ नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को अक्सर अपनी फाइनल सैलरी के लिए हफ्तों या महीनों इंतजार करना पड़ता था। सरकार ने 2 दिन की यह सख्त समय-सीमा तय करके एग्जिट प्रोसेस को ज़्यादा पारदर्शी बनाने और कर्मचारियों को उनकी मेहनत की कमाई का पैसा तुरंत उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है।
सिर्फ 'वेजेज' (Wages) का है नियम
कर्मचारियों को यह समझना ज़रूरी है कि 2 दिन का यह नियम सिर्फ कमाए हुए 'वेजेज' यानी सैलरी के भुगतान पर लागू होता है। फुल एंड फाइनल सेटलमेंट (Full and Final Settlement) में कई और चीजें भी शामिल होती हैं, जिनका भुगतान अपने अलग समय-सीमा के अनुसार होता है। इनमें लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment), बोनस (Bonus), और बाकी पेंडिंग रीइम्बर्समेंट (Reimbursement) शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, ग्रेच्युटी (Gratuity) जैसे वैधानिक लाभों के लिए अपने अलग एक्ट्स और कंपनी पॉलिसीज़ हैं, जो जरूरी नहीं कि 2 दिन की समय-सीमा के साथ मेल खाएं। निवेशकों और कर्मचारियों को इसे सभी तरह के पेमेंट के तुरंत भुगतान के बजाय, मुख्य सैलरी भुगतान में तेजी के तौर पर देखना चाहिए।
कर्मचारियों को भी करनी होगी पूरी तैयारी
इन सख्त समय-सीमाओं के बावजूद, सेटलमेंट की रफ़्तार काफी हद तक कर्मचारी की तरफ से कामों को पूरा करने पर भी निर्भर करेगी। अगर कोई कर्मचारी कंपनी की प्रॉपर्टी (जैसे लैपटॉप, मोबाइल) वापस करने, प्रोजेक्ट हैंडओवर पूरा करने, या पेंडिंग क्लेम सबमिट करने जैसे ज़रूरी काम नहीं करता है, तो कंपनी के लिए 2 दिन के अंदर फाइनल अमाउंट कैलकुलेट करके भुगतान करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, यह ज़रूरी है कि कर्मचारी अपने रिजाइन एक्सेप्टेंस, सबमिट किए गए क्लेम्स और एसेट के साइन्ड एकनॉलेजमेंट के व्यवस्थित रिकॉर्ड्स रखें।
कंपनियों के लिए ऑपरेशनल बदलाव
कंपनियों के लिए, यह बदलाव उनके पेरोल (Payroll) और एग्जिट मैनेजमेंट सिस्टम (Exit Management Systems) में बड़े अपग्रेड की मांग करता है। ऑर्गनाइजेशन को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके HR और फाइनेंस डिपार्टमेंट के पास अटेंडेंस, आउटस्टैंडिंग लोंस और कंपनी प्रॉपर्टी की रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध हो। कंपनियों को अपने एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स (Employment Contracts) को भी रिवाइज करना पड़ सकता है ताकि नोटिस पीरियड और डिडक्शन (Deductions) से जुड़े नियम स्पष्ट हों, क्योंकि नए रेगुलेशन कर्मचारी की फाइनल पे (Final Pay) से की जाने वाली किसी भी रिकवरी या डिडक्शन में पारदर्शिता पर ज़ोर देते हैं। इन नए नियमों के अनुसार अपने सिस्टम को अपडेट न करने वाली कंपनियों को रेगुलेटरी जांच या एडमिनिस्ट्रेटिव चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
