Nestlé India का जलवा! शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर, Sensex-Nifty दो महीने की नई तेजी पर

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
Nestlé India का जलवा! शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर, Sensex-Nifty दो महीने की नई तेजी पर
Overview

21 अप्रैल को भारतीय शेयर बाज़ार, Sensex और Nifty, लगभग दो महीने की सबसे ऊंची क्लोजिंग के करीब बंद हुए। इस मजबूत तेजी का मुख्य श्रेय Nestlé India को जाता है, जिसके शेयर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। यह घरेलू बाज़ार की मजबूती, ग्लोबल भू-राजनीतिक तनावों, $116 प्रति बैरल के पार निकले कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी नीतियों में हो रहे बदलावों के बीच देखने को मिली। IT सेक्टर की कंपनी Persistent Systems के नतीजों में आई नरमी ने थोड़ी चिंता ज़रूर बढ़ाई।

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भारतीय बाज़ार रिकॉर्ड ऊंचाई पर

21 अप्रैल को भारतीय शेयर बाज़ारों के प्रमुख इंडेक्स Sensex और Nifty पिछले दो महीनों के उच्चतम स्तर के करीब बंद हुए। Sensex 79,273 के स्तर पर और Nifty 24,577 के पार बंद हुआ, जिसकी अगुवाई मुख्य रूप से घरेलू कंपनियों के मजबूत प्रदर्शन ने की।

Nestlé India का ऐतिहासिक उछाल

इस तेज़ी का मुख्य आकर्षण Nestlé India रही, जिसके शेयर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंचे। इसने कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर को ज़बरदस्त बूस्ट दिया। कंपनी ने अपनी हालिया तिमाही नतीजों में डबल-डिजिट वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की, जो मज़बूत कंज्यूमर डिमांड का संकेत है। Nestlé India के मार्केट वैल्यू में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा हुआ, जिसे निवेशकों का कंपनी के भविष्य की कमाई पर भरोसे का समर्थन मिला। कंपनी का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो लगभग 80x रहा, जो इसके मूल्यांकन को दर्शाता है।

IT सेक्टर में मिली-जुली तस्वीर

इसके विपरीत, IT सेक्टर में मिले-जुले संकेत मिले। Persistent Systems ने चौथी तिमाही में ₹529 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो विश्लेषकों की ₹535 करोड़ की उम्मीद से थोड़ा कम था। हालांकि, कंपनी ने ₹18 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया। प्रॉफिट में आई यह कमी IT सेक्टर पर संभावित दबाव का संकेत देती है। वहीं, कंपनी का P/E रेश्यो लगभग 35x रहा, जो Nestlé India की तुलना में काफी कम है। LTIMindtree जैसी अन्य IT फर्म भी अलग-अलग ग्रोथ पाथ पर हैं।

ग्लोबल चुनौतियां: भू-राजनीति और तेल के दाम

वैश्विक बाज़ार लगातार भू-राजनीतिक तनावों पर नज़र बनाए हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में आई रुकावट और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सख्त बयानों से बाज़ार में अनिश्चितता बनी हुई है। इन चिंताओं को कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से और बढ़ाया है, जिससे अप्रैल में भारत के क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत बढ़कर $116 प्रति बैरल तक पहुँच गई, जो फरवरी में $63 थी। यह तेज़ी वैश्विक सप्लाई में अस्थिरता और भारत के लिए महंगाई के दबाव का संकेत देती है।

नीतियों में बदलाव और व्यापारिक चिंताएं

अमेरिकी नीतियों में हो रहे बदलावों से भी अनिश्चितता बढ़ रही है। फेडरल रिजर्व के चेयर नॉमिनी केविन वार्श की पुष्टि सुनवाई, जिन्होंने राष्ट्रपति के प्रभाव से स्वतंत्रता का वादा किया है, आर्थिक जटिलताओं को बढ़ाती है। वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में टैरिफ के तौर पर $165 बिलियन तक की राशि वापस करने का आदेश दिया गया है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में अप्रत्याशितता आई है, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

बाज़ार का लचीलापन और भविष्य का अनुमान

ऐतिहासिक रूप से, भारतीय इक्विटीज़ ने मज़बूती दिखाई है, और अक्सर भू-राजनीतिक चिंताओं को पार कर लिया है जब घरेलू विकास की कहानी मज़बूत रही हो। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें लंबे समय तक बनी रहने पर महंगाई की चिंताएं बढ़ा सकती हैं और ब्याज दरों में बदलाव को प्रेरित कर सकती हैं, जो इक्विटी वैल्यूएशन के लिए एक जोखिम पैदा कर सकता है। विश्लेषक Nestlé India के लिए लगातार मज़बूत ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं। Persistent Systems के लिए, नतीजों पर बारीकी से नज़र रखने की आवश्यकता होगी। व्यापक भारतीय बाज़ार की दिशा घरेलू कॉर्पोरेट स्ट्रेंथ और बदलते ग्लोबल भू-राजनीतिक व आर्थिक परिदृश्य के बीच तालमेल पर निर्भर करेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.