अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) की संभावित सख्त मौद्रिक नीति और बाजार से लिक्विडिटी (liquidity) वापस खींचने की चिंताओं ने Nasdaq में भूचाल ला दिया है। इस वजह से इंडेक्स में 6% की बड़ी गिरावट देखी गई है।
लिक्विडिटी की री-प्राइसिंग
यह गिरावट बाजार के उस डर को दर्शाती है कि फेडरल रिजर्व लंबे समय से चली आ रही आसान लिक्विडिटी के दौर को खत्म कर सकता है। फेड ने दिसंबर 2025 तक अपने बैलेंस शीट से लगभग $2.2 ट्रिलियन की संपत्ति वापस खींच ली है। यह कदम महंगाई को काबू करने के लिए उठाया गया था, जिससे सिस्टम में लिक्विडिटी कम हो जाती है। पिछले कुछ समय से बाजार में आसानी से उपलब्ध लिक्विडिटी के दौर का अंत माना जा रहा है। ऐसे टाइटनिंग फेज (tightening phase) अक्सर इकोनॉमिक डाउनटर्न (economic downturn) से पहले देखे जाते हैं। अब बाजार यह मानकर चल रहा है कि भविष्य में लिक्विडिटी काफी कम होगी और फेड का बैलेंस शीट भी छोटा होगा, जिससे ग्लोबल डीलेवरेजिंग (deleveraging) का ट्रेंड शुरू हो गया है। Nasdaq का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो फरवरी 2026 की शुरुआत में लगभग 25.20 से 34.2 के बीच है। हालांकि यह ऐतिहासिक दायरे में है, लेकिन यह मौद्रिक सख्ती के प्रति हमेशा संवेदनशील रहा है।
टेक खर्चों पर बढ़ी निगरानी
इस बाजार की घबराहट की एक बड़ी वजह टेक दिग्गजों, खासकर Microsoft का भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) है। Microsoft ने Q2 FY26 में $81.3 बिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जो 17% बढ़ा है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से AI-संचालित Azure क्लाउड सर्विसेज की डिमांड के कारण हुई। लेकिन, AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे GPUs और डेटा सेंटरों पर कंपनी का capex बढ़कर $37.5 बिलियन हो गया। Amazon जैसी कंपनियाँ भी इस साल AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग $200 बिलियन खर्च करने की योजना बना रही हैं। यह भारी निवेश भविष्य की ग्रोथ के लिए जरूरी है, लेकिन विश्लेषकों को चिंता है कि अगर AI एडॉप्शन (adoption) उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो मार्जिन पर दबाव आ सकता है। Microsoft की कमाई का एक बड़ा हिस्सा OpenAI पार्टनरशिप से जुड़ा है, जो इस चिंता को और बढ़ाता है।
ग्लोबल कैपिटल फ्लो में बदलाव
टेक सेक्टर के अलावा, कम लिक्विडिटी का असर क्रिप्टो मार्केट पर भी दिख रहा है, जहाँ असामान्य रूप से पतली लिक्विडिटी (unusually thin liquidity) के संकेत मिल रहे हैं। यह ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के टाइट मॉनेटरी कंडीशन (tighter monetary conditions) के एडजस्टमेंट का हिस्सा है।
भारतीय बाजार का नज़रिया
भारत के बाजार में भी निवेशक पॉलिसी संकेतों के बावजूद सतर्क हैं। 1 फरवरी 2026 को पेश हुए यूनियन बजट 2026-27 में कैपिटल एक्सपेंडिचर और इंडस्ट्रियल ग्रोथ पर जोर दिया गया है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के फ्लो में मिलाजुला रुझान है। हाल ही में इंडिया-यूएस ट्रेड डील के बाद वे नेट बायर (net buyer) बने हैं, लेकिन निवेशकों का भरोसा पॉलिसी के ठोस क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा, न कि सिर्फ घोषणाओं पर।