मुनाफे में गिरावट, पर तिमाही में सुधार
NSE के लिए Q3 FY26 के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) साल-दर-साल (YoY) 37% घटकर ₹2,408 करोड़ पर आ गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹3,834 करोड़ था। इस गिरावट का एक बड़ा कारण ग्रेच्युटी प्रोविज़न (gratuity provision) के लिए ₹126 करोड़ का वन-ऑफ खर्च था, जो नए लेबर कोड के चलते किया गया।
हालांकि, तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर देखें तो तस्वीर बेहतर है। NSE का मुनाफा पिछली तिमाही (Q2 FY26) के ₹2,098 करोड़ से 15% बढ़कर आया है।
रेवेन्यू और EBITDA में क्या रहा?
रेवेन्यू की बात करें तो ऑपरेशन से होने वाली आमदनी साल-दर-साल 9% घटकर ₹3,925 करोड़ रही। लेकिन, कुल आय (total income) पिछली तिमाही के मुकाबले 6% बढ़कर ₹4,395 करोड़ दर्ज की गई। ऑपरेटिंग EBITDA में साल-दर-साल 16% की गिरावट आई और यह ₹2,851 करोड़ रहा। पर, पिछली तिमाही से इसमें 92% का ज़बरदस्त उछाल देखने को मिला। EBITDA मार्जिन भी पिछली तिमाही के 40% से सुधरकर 73% हो गया, हालांकि यह पिछले साल की समान अवधि के 78% से थोड़ा कम है।
ट्रेडिंग वॉल्यूम्स में तेज़ी
इन नतीजों के बीच, NSE पर ट्रेडिंग वॉल्यूम्स (trading volumes) में लगातार तेज़ी बनी हुई है। कैश मार्केट सेगमेंट में एवरेज डेली ट्रेडेड वॉल्यूम (ADTV) पिछली तिमाही से 3% बढ़कर ₹99,023 करोड़ हो गया। फ्यूचर्स सेगमेंट का ADTV 8% बढ़कर ₹1,51,744 करोड़ और ऑप्शंस सेगमेंट का ADTV 15% बढ़कर ₹53,248 करोड़ पर पहुंच गया।
IPO को मिली मंज़ूरी, बाज़ार में हलचल
ये वित्तीय नतीजे ऐसे समय पर आए हैं जब NSE को अपना पहला पब्लिक ऑफर (IPO) लाने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) मिल गया है। कंपनी के बोर्ड ने भी ऑफर फॉर सेल (OFS) को मंज़ूरी दे दी है। यह IPO, जो एक दशक से ज़्यादा समय से लंबित था, बाज़ार में एक बड़ी घटना बनने की उम्मीद है।
SEBI से क्लीयरेंस एक बड़ी राहत है, खासकर को-लोकेशन मामले में ₹1,388 करोड़ के सेटलमेंट के बाद, जिसने कई सालों की रेगुलेटरी बाधाओं को दूर किया। मार्केट का अनुमान है कि IPO के ज़रिए NSE का वैल्यूएशन ₹5 लाख करोड़ से ज़्यादा हो सकता है, और इश्यू साइज़ ₹21,000 से ₹25,000 करोड़ के बीच रह सकता है। यह IPO अगले 7 से 8 महीनों में लॉन्च हो सकता है।
निवेशक अब साल-दर-साल प्रॉफिट में गिरावट और रेवेन्यू में कमी को, तिमाही-दर-तिमाही प्रदर्शन में सुधार, मजबूत ट्रेडिंग वॉल्यूम्स और IPO की मंज़ूरी के साथ जोड़कर देखेंगे। एक्सचेंज की बाज़ार में धाक और इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग को देखते हुए, IPO को लेकर बाज़ार की प्रतिक्रिया अहम होगी।