कानूनी पचड़े में फंसा NSE का IPO, लिस्टिंग पर अनिश्चितता
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई इस रिट पिटीशन में NSE पर डेरिवेटिव ट्रेड एडजस्टमेंट रूल्स के उल्लंघन और ट्रेडर्स से मिले फंड के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। यह याचिका SEBI द्वारा जारी 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) को चुनौती दे रही है। इस कानूनी अड़चन से NSE के आईपीओ में और देरी होने की आशंका है, जिसका सीधा असर इसके वैल्यूएशन और मौजूदा शेयरधारकों के एग्जिट प्लान पर पड़ेगा। आपको बता दें कि NSE का IPO साल 2016 से ही रुका हुआ है, जो को-लोकेशन स्कैंडल और गवर्नेंस संबंधी चिंताओं के चलते बार-बार टल रहा है। SEBI ने 2019 में भी इसका ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस लौटा दिया था।
ट्रेड डील और FII की उम्मीदों पर पानी?
यह सब तब हो रहा है जब भारत की इकोनॉमी एक मजबूत दौर से गुजर रही है। अमेरिका के साथ बेहतर ट्रेड डील्स और सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका की वजह से एक्सपोर्ट बढ़ने की उम्मीद है। इसके चलते एफआईआई (Foreign Institutional Investors) भी भारतीय बाजारों में सेलेक्टिव तरीके से निवेश बढ़ा रहे हैं। खासकर मेटल्स, माइनिंग, कैपिटल गुड्स और डोमेस्टिक डिमांड वाले सेक्टर्स जैसे बैंकिंग, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल में उनकी दिलचस्पी दिख रही है। लेकिन NSE के IPO पर आई यह कानूनी मुसीबत, बाज़ार की इस उम्मीद पर पानी फेर सकती है।
IPO मार्केट की रफ्तार धीमी, वैल्यूएशन पर भी नजर
वैसे, भारत का IPO मार्केट 2025 में शानदार लिस्टिंग गेन का रिकॉर्ड बनाने के बाद अब थोड़ा धीमा हुआ है। 2024 में जहां 30% लिस्टिंग गेन देखने को मिला था, वहीं 2025 में यह घटकर 10% रह गया। इससे रिटेल इन्वेस्टर्स में थोड़ी थकान दिख रही है। हालांकि, 2026 में आईपीओ पाइपलाइन मजबूत रहने की उम्मीद है, और ₹4 लाख करोड़ तक का फंड जुटाया जा सकता है। इसके अलावा, मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट्स में वैल्यूएशन मिले-जुले दिख रहे हैं। Nifty Smallcap 100 का PE रेशियो 25.2 के आसपास है, जो 5 साल के औसत 28.13 से कम है।
सोने में मजबूती, चांदी में उथल-पुथल और STT का असर
दूसरी तरफ, कीमती धातुओं (Precious Metals) में एक बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। सोना $5,020 प्रति औंस के आसपास मजबूती बनाए हुए है और अपने बुल रन को जारी रखने की उम्मीद है। वहीं, चांदी, जिसने 2025 में सोने से कहीं ज़्यादा 149.1% की छलांग लगाई थी, अब काफी वोलेटाइल हो गई है। जनवरी 2026 के अपने शिखर $120 के ऊपर से गिरकर यह $77 प्रति औंस के आसपास आ गई है। औद्योगिक मांग के बावजूद, सट्टेबाजी में कमी और डॉलर की मजबूती इस पर दबाव बना रही है। इसके अलावा, 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला STT (Securities Transaction Tax) हाइक भी मार्केट लिक्विडिटी को कम कर सकता है, जिससे खासकर डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडर्स की गतिविधि प्रभावित हो सकती है।