NITI Aayog ने भारत की बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप जारी किया है। इसके तहत, 2035 तक बायोटेक्नोलॉजी इकोनॉमी का आकार $691 अरब और 2047 तक $2.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए AI-संचालित बायोटेक, रेगुलेटरी सुधारों और ₹50,000 करोड़ के ग्रोथ फंड पर फोकस किया जाएगा।
भारत बनेगा बायोटेक्नोलॉजी का ग्लोबल पावरहाउस?
NITI Aayog ने भारत को ग्लोबल बायोटेक्नोलॉजी पावरहाउस बनाने के लिए एक स्ट्रैटेजिक रोडमैप पेश किया है। 'Roadmap for Building India as a Leading BioEconomy Powerhouse by 2035' नाम के इस विजन डॉक्यूमेंट में अगले 9 सालों में सेक्टर का वैल्यूएशन $691 अरब तक पहुंचाने और 2047 तक इसे $2.6 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की योजना है। यह कदम बायोलॉजी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के साथ जोड़ने की एक बड़ी पॉलिसी पहल है, जिससे भारत ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटिशन कर सके।
मिशन-मोड एग्जीक्यूशन पर जोर
इस टारगेट को पूरा करने के लिए, NITI Aayog का कहना है कि बिखरे हुए रिसर्च एफर्ट्स को छोड़कर एक unified नेशनल स्ट्रैटेजी अपनाने की जरूरत है। इसके लिए एम्पावर्ड कमेटियों के गठन की सिफारिश की गई है, ताकि सरकारी मिनिस्ट्रीज, इंडस्ट्री और एकेडमिक इंस्टीट्यूशंस के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन हो सके। इस स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा ₹50,000 करोड़ का 'बायो-इकोनॉमी ग्रोथ फंड' (BioEconomy Growth Fund) प्रपोज किया गया है। यह फंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, इनोवेशन और बायो-मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस को बढ़ाने के लिए कैपिटल प्रोवाइड करेगा। इसका मकसद भारत को ट्रेडिशनल रिसर्च मॉडल से नेक्स्ट-जेनरेशन बायो-मैन्युफैक्चरिंग की ओर ले जाना है, जिससे 30 मिलियन से ज्यादा नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
2014 से 2025 तक शानदार ग्रोथ
पिछले एक दशक में इंडियन बायोटेक्नोलॉजी इकोनॉमी ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। डेटा के मुताबिक, यह सेक्टर 2014 में लगभग $10 अरब से बढ़कर 2025 तक $195.3 अरब तक पहुंच गया है, यानी करीब 16 गुना की बढ़ोतरी। इस तेजी से सेक्टर का नेशनल GDP में योगदान 4.8% तक पहुंच गया है। हालांकि, इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल की स्पीड और स्पेशलाइज्ड बायोसाइंस टैलेंट जैसी मौजूदा बाधाओं को दूर करना होगा।
ग्लोबल कॉम्पिटिशन और एग्जीक्यूशन रिस्क
दुनिया भर में बायोलॉजिकल-लेड इंडस्ट्रियल मॉडल को प्राथमिकता दी जा रही है। अमेरिका जहां बायोटेक पर कॉम्प्रिहेंसिव गवर्नमेंट अप्रोच अपना रहा है, वहीं यूरोपियन यूनियन इसे क्लाइमेट कॉम्पिटिटिवनेस से जोड़ रहा है। चीन ने भी बायोटेक्नोलॉजी को अपने नेशनल फाइव-ईयर इंडस्ट्रियल प्लान में शामिल किया है। भारतीय निवेशकों के लिए, यह देखना अहम होगा कि प्रपोज्ड 'बायो-इकोनॉमी ग्रोथ फंड' कब लागू होता है और इसके बाद कौन से स्पेसिफिक रेगुलेटरी रिफॉर्म्स आते हैं। ये लक्ष्य भले ही बड़े हों, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के टाइमलाइन, ग्लोबल मार्केट में कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग बनाए रखने और AI और बायोलॉजिकल रिसर्च के इंटीग्रेशन जैसे एग्जीक्यूशन रिस्क भी मौजूद हैं। निवेशकों को लॉन्ग-टर्म टारगेट की दिशा में प्रगति के संकेत के तौर पर भविष्य की पॉलिसी अनाउंसमेंट्स और फंड के एलोकेशन पर नजर रखनी चाहिए।
