निवेशकों के लिए अच्छी खबर! NITI Aayog ने 'Investment Friendliness Index' लॉन्च किया है। यह इंडेक्स 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को **84** अलग-अलग पैमानों पर मापता है, जिससे फैक्ट्रियों और लॉजिस्टिक्स के लिए सही जगह चुनना आसान हो जाएगा।
Detailed Coverage
निवेशकों के लिए क्यों खास है ये इंडेक्स?
NITI Aayog ने अपना पहला 'Investment Friendliness Index' जारी किया है। यह एक डेटा-आधारित टूल है जो कंपनियों को मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, लॉजिस्टिक्स हब और डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए सबसे अच्छी जगहों की पहचान करने में मदद करेगा। इस इंडेक्स में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन 84 इंडिकेटर्स के आधार पर किया गया है। ये इंडिकेटर्स आठ खास पिलर्स में बांटे गए हैं, जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर की क्वालिटी, बिजनेस का माहौल, सरकारी नीतियां और पर्यावरण संबंधी मजबूती शामिल हैं।
पहले, कंपनियों को अलग-अलग रिपोर्ट्स या राज्यों की अपनी जानकारी पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब NITI Aayog ने इन सभी मेट्रिक्स को एक ही फ्रेमवर्क में लाकर ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) में लगने वाले समय को कम करने का लक्ष्य रखा है। शुरुआती रैंकिंग में गुजरात सबसे आगे रहा, उसके बाद महाराष्ट्र और तमिलनाडु का नंबर आया। वहीं, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार जैसे राज्य पीछे दिखाई दिए। इससे देश भर में इन्वेस्टमेंट के लिए तैयारी के स्तर में बड़ा अंतर साफ नजर आता है।
आर्थिक विकास का नया लक्ष्य
यह पहल देश के आर्थिक विकास को गति देने के बड़े प्लान का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य 7.8% सालाना की रियल GDP ग्रोथ हासिल करना है, ताकि 2047 तक भारत एक विकसित अर्थव्यवस्था बन सके। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी राष्ट्रीय नीतियों ने पहले ही एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार बनाने में मदद की है। हालांकि, कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) के रास्ते में अभी भी स्थानीय कारक सबसे बड़ी बाधा हैं। जमीन अधिग्रहण, स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक दक्षता जैसे मुद्दे अक्सर बड़े प्रोजेक्ट्स की सफलता या देरी को तय करते हैं।
आगे क्या?
यह इंडेक्स पारदर्शिता की दिशा में एक कदम है, लेकिन इसमें कुछ सीमाएं भी हैं। यह अभी एक स्टेट-सेंट्रिक (State-Centric) मॉडल पर काम करता है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग या ग्रीन हाइड्रोजन जैसे खास सेक्टर्स के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक (Sector-Specific) मैट्रिक्स की कमी एक बड़ी कमी है। हो सकता है कि कोई राज्य बिजनेस करने में आसानी के मामले में टॉप पर हो, लेकिन वहां किसी खास हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी विशेष बिजली ग्रिड या पानी का इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद न हो। इस इंडेक्स की असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह पिछड़ रहे राज्यों को बेहतर नीतियां बनाने और अधिक कैपिटल आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। आने वाले समय में, यह देखना होगा कि क्या NITI Aayog खास उद्योगों के लिए सब-इंडेक्स (Sub-indices) लाता है या राज्यों की नीतियों के अमल में तेजी से हो रहे बदलावों को दर्शाने के लिए रैंकिंग को और बार-बार अपडेट करता है।
