क्या RBI दरों में बढ़ोतरी करेगा?
5 जून को होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग से पहले ब्याज दरों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जहां अक्सर ये माना जाता है कि करेंसी (Currency) को स्थिर रखने के लिए RBI ब्याज दरें बढ़ा सकता है, वहीं Morgan Stanley की नई रिपोर्ट इस सोच को चुनौती देती है। फर्म का कहना है कि मौजूदा इकोनॉमिक इंडिकेटर्स, खासकर महंगाई और करेंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit), टाइट मॉनेटरी पॉलिसी के पक्ष में नहीं हैं।
कैपिटल इनफ्लो और इक्विटी पर असर
भारत के इक्विटी मार्केट (Equity Market) की स्थिरता में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट (FII) का बड़ा हाथ है। अगर RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो इससे फॉरेन इन्वेस्टमेंट पर असर पड़ सकता है, क्योंकि डोमेस्टिक यील्ड (Yield) और ग्रोथ की उम्मीदें कम हो जाएंगी। Morgan Stanley का मानना है कि RBI को ऐसी पॉलिसी बनानी चाहिए जिससे फॉरेन कैपिटल का आना आसान हो। यह कदम रुपए को सहारा देने के साथ-साथ डोमेस्टिक इन्वेस्टमेंट को भी बढ़ावा देगा।
डोमेस्टिक ग्रोथ के स्ट्रक्चरल कारण
दुनिया भर की चुनौतियों के बावजूद, भारत का इन्वेस्टमेंट माहौल काफी मजबूत बना हुआ है। इसकी वजह है कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) साइकिल और सप्लाई चेन का लोकलाइजेशन। डिफेंस और एनर्जी ट्रांजिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बड़े निवेश हो रहे हैं। अन्य एशियाई देशों के विपरीत, जो एक्सपोर्ट पर ज्यादा निर्भर हैं, भारत अपनी डोमेस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करके ग्लोबल उतार-चढ़ाव से खुद को बचा रहा है। इससे ग्रोथ को सहारा मिलेगा, बशर्ते मॉनेटरी पॉलिसी प्राइवेट और पब्लिक इन्वेस्टमेंट की रफ्तार को धीमा न करे।
रुपए का आउटलुक और रिस्क
बैलेंस-ऑफ-पेमेंट्स के चलते रुपए पर थोड़ा दबाव रहा है, लेकिन आगे चलकर इसमें सुधार की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर ग्लोबल ऑयल प्राइस (Oil Price) में नरमी आती है और डॉलर कमजोर होता है, तो रुपए पर दबाव कम होगा। हालांकि, ग्लोबल एनर्जी मार्केट में कोई बड़ा झटका या डॉलर में अचानक तेजी जैसे एक्सटर्नल रिस्क बने हुए हैं। अगर RBI की पॉलिसी और US फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की पॉलिसी में बड़ा अंतर आता है, तो यील्ड गैप बढ़ सकता है, जो डोमेस्टिक ग्रोथ और कैपिटल स्टेबिलिटी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
