Morgan Stanley ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 2035 का अपना अनुमान बढ़ाकर $1.5 ट्रिलियन कर दिया है। यह पहले के $1.1 ट्रिलियन के अनुमान से काफी ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी प्रोत्साहन और ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव के कारण यह सेक्टर 2035 तक GDP में **20%** का योगदान दे सकता है।
Detailed Coverage
मैन्युफैक्चरिंग में आएगी बम्पर तेजी?
निवेश बैंक Morgan Stanley ने भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए लंबी अवधि के ग्रोथ का अनुमान काफी बढ़ा दिया है। बैंक का नया अनुमान है कि 2035 तक देश का मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट $1.5 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा। यह उनके पिछले अनुमान $1.1 ट्रिलियन से काफी ऊपर है। इससे मैन्युफैक्चरिंग का GDP में योगदान मौजूदा 15% से बढ़कर 20% हो सकता है।
क्यों बढ़ रहा है मैन्युफैक्चरिंग का ग्राफ?
इस बड़े अनुमान के पीछे तीन मुख्य कारण बताए गए हैं:
- सरकारी नीतियां: 2019 से लगातार सरकारी औद्योगिक नीतियों ने कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।
- ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव: दुनिया भर की बड़ी कंपनियां अब चीन से हटकर अपनी सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई कर रही हैं, जिससे भारत को फायदा हो सकता है।
- युवा आबादी: भारत की बड़ी और युवा कार्यशील आबादी अगले दशक में एक कॉम्पिटिटिव लेबर एडवांटेज प्रदान कर सकती है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और PLI स्कीम का कमाल
हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में यह बदलाव पहले ही दिख रहा है। सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम, जिसके तहत 2020 से विभिन्न सेक्टरों के लिए करीब $33 बिलियन आवंटित किए गए हैं, एक बड़ा बूस्टर साबित हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के बाद से सात गुना बढ़ गया है। खासकर मोबाइल फोन एक्सपोर्ट में भारी उछाल आया है, जो 2015 में $260 मिलियन से बढ़कर इस फाइनेंशियल ईयर में $29.6 बिलियन हो गया है। यह अब भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट प्रोडक्ट बन गया है।
किन जोखिमों पर रखनी होगी नजर?
हालांकि, आउटलुक काफी पॉजिटिव है, लेकिन कुछ जोखिम भी हैं जो इस ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं:
- ग्लोबल डिमांड में गिरावट: अगर ग्लोबल डिमांड कम होती है, तो भारतीय एक्सपोर्ट की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है।
- ग्लोबल वैल्यू चेन में एकीकरण: भारत को अभी भी ग्लोबल वैल्यू चेन में पूरी तरह से एकीकृत होने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। 2024 में, भारत का पार्टिसिपेशन इंडेक्स 0.387 था, जो वियतनाम (0.575) और फिलीपींस (0.412) जैसे देशों से कम है।
- सुधारों में देरी और इंफ्रास्ट्रक्चर: इंडस्ट्रियल रिफॉर्म्स और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी भी $1.5 ट्रिलियन के लक्ष्य को पाने में बाधा डाल सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
आगे चलकर, असली ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत ग्लोबल वैल्यू चेन में अपनी भागीदारी की कमियों को कितनी प्रभावी ढंग से दूर करता है। निवेशक इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली से जुड़ी कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रख सकते हैं और PLI कार्यक्रमों के विस्तार पर सरकारी अपडेट्स पर भी ध्यान दे सकते हैं। Morgan Stanley के अनुमान के अनुसार, बेस केस में यह आंकड़ा $1.45 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है, जबकि मंदी की स्थिति में यह $904 बिलियन तक सीमित रह सकता है।
