Morgan Stanley ने घटाई भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, तेल झटके का डर!

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Morgan Stanley ने घटाई भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, तेल झटके का डर!
Overview

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने भारत के लिए वित्त वर्ष 2027 (FY27) की GDP ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है। अब यह **6.2%** रहने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल (crude oil) की ऊंची कीमतें और बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है।

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Morgan Stanley की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी खासकर एनर्जी प्राइस शॉक के प्रति काफी सेंसेटिव है। फर्म ने FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अपना बेस-केस अनुमान 0.3 परसेंट पॉइंट घटाकर 6.2% कर दिया है। यह अनुमान Brent क्रूड ऑयल के $95 प्रति बैरल के एवरेज प्राइस पर आधारित है। लेकिन, रिपोर्ट में एक गंभीर स्थिति की आशंका भी जताई गई है। अगर Brent क्रूड ऑयल $150 प्रति बैरल तक पहुंच जाता है, तो यह ग्रोथ 5.7% तक गिर सकती है।

इस झटके से महंगाई RBI के 6% के टारगेट को पार कर सकती है और करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) GDP का करीब 3% हो सकता है। मौजूदा हालात, जैसे कि ईरान और स्ट्रेट ऑफ Hormuz के आसपास बढ़ा तनाव, Brent क्रूड को पहले ही $111 प्रति बैरल के पार ले जा चुका है। इससे समुद्री यातायात में भी कमी आई है। प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने, प्राइस हाइक से कंज्यूमर खर्च घटने और प्रभावित इलाकों में एक्सपोर्ट कमजोर होने से इकोनॉमी धीमी हो सकती है। Nifty 50 और BSE Sensex के मौजूदा वैल्यूएशन (P/E रेश्यो करीब 20.3-20.4%) बताते हैं कि निवेशक अभी इन बढ़ते रिस्क को पूरी तरह नहीं आंक रहे हैं।

Morgan Stanley का यह अनुमान कई दूसरी रेटिंग एजेंसियों के भी इसी तरह के अनुमानों के अनुरूप है, हालांकि यह अलग-अलग स्तरों पर है। Moody's Ratings ने FY27 ग्रोथ का अनुमान 6.8% से घटाकर 6.0% कर दिया है। OECD का अनुमान है कि ग्रोथ घटकर 6.1% हो सकती है, जबकि महंगाई 5.1% तक जा सकती है। वहीं, S&P Global और Crisil ज्यादा ऑप्टिमिस्टिक हैं और उन्होंने FY27 ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। ICICI Bank ने अपना अनुमान घटाकर 6.8-6.9% किया है। ऐतिहासिक रूप से, लगातार ऊंची तेल कीमतों का असर भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर साफ दिखता है। 2022 में कीमतों में आई उछाल के बाद FY23 में मैन्युफैक्चरिंग धीमी हो गई थी। बड़े ऑयल इंपोर्ट बिल के कारण बढ़ता करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) यह बताता है कि लगातार तीसरे साल एक्सटर्नल पेमेंट में कमी आ सकती है, जिससे रुपये में गिरावट का खतरा बढ़ जाता है।

भारत की इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के लिए एक बड़ा कंसर्न फिस्कल प्रेशर और एक्सटर्नल पेमेंट का बढ़ता दबाव है। Morgan Stanley का अनुमान है कि फिस्कल डेफिसिट बजट में तय 4.3% से 0.3 से 0.5 परसेंट पॉइंट ऊपर जा सकता है। इसका कारण सब्सिडी पर ज्यादा खर्च और फ्यूल एक्साइज ड्यूटी में कटौती से रेवेन्यू में कमी है। इससे डेट-टू-GDP रेश्यो के सरकार के FY31 तक 50% तक लाने के लक्ष्य में रुकावट आ सकती है। भारत एनर्जी इम्पोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर है, करीब 85% तेल की खपत इम्पोर्ट से होती है। ऐसे में यह कीमतों के झटकों के प्रति बेहद वल्नरेबल है। स्ट्रेट ऑफ Hormuz के आसपास का जियोपॉलिटिकल संकट सप्लाई बाधित कर और कीमतें बढ़ाकर इन रिस्क को और गंभीर बना रहा है। हालांकि होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) में मामूली बढ़ोतरी दिख रही है, लेकिन ग्लोबल एनर्जी कॉस्ट में तेज उछाल से महंगाई में शार्प जंप का खतरा बढ़ जाता है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से उम्मीद है कि वह अपनी 5.25% की पॉलिसी रेपो रेट को स्थिर रखेगा और 8 अप्रैल की मीटिंग में न्यूट्रल स्टैंस बनाए रखेगा। RBI महंगाई और ग्रोथ दोनों चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा। सरकार के स्तर पर, सब्सिडी और टैक्स एडजस्टमेंट जैसी फिस्कल पॉलिसी मुख्य टूल हो सकती है। सरकार ने FY27 के बजट में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं और कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) पर जोर देना जारी रखा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि भारत की डोमेस्टिक स्ट्रेंथ, जैसे मजबूत कंज्यूमर डिमांड और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, ग्लोबल इकोनॉमिक प्रेशर के असर को कुछ हद तक कम कर सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.