Morgan Stanley का बड़ा फैसला: इक्विटी पर दांव घटाया, US Treasuries और कैश को बनाया 'Safe Haven'!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Morgan Stanley का बड़ा फैसला: इक्विटी पर दांव घटाया, US Treasuries और कैश को बनाया 'Safe Haven'!
Overview

Morgan Stanley ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते ग्लोबल इक्विटी (Equity) में अपनी पोजीशन को 'ओवरवेट' से घटाकर 'इक्वल वेट' कर दिया है। फर्म अब US Treasuries और कैश को सुरक्षित निवेश (Safe Havens) मान रही है।

मिडिल ईस्ट में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और इसके चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई बेतहाशा तेजी ने ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है। इन अनिश्चितताओं के बीच, दिग्गज ब्रोकरेज फर्म Morgan Stanley ने अपनी ग्लोबल एसेट एलोकेशन (Asset Allocation) रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।

फर्म ने ग्लोबल इक्विटी में अपनी रेटिंग को 'ओवरवेट' (Overweight) से घटाकर 'इक्वल वेट' (Equal Weight) कर दिया है। यह कदम निवेशकों के बीच रिस्क लेने की क्षमता में कमी का संकेत देता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Brent क्रूड ऑयल $115 प्रति बैरल के पार निकल गया है, जो कि पिछले कुछ सालों में सबसे बड़ा उछाल है। Morgan Stanley का मानना है कि तेल की सप्लाई में रुकावट का खतरा ग्लोबल इक्विटी वैल्यूएशन (Equity Valuations) पर भारी पड़ सकता है। फर्म ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें $150 से $180 प्रति बैरल के बीच बनी रहती हैं, तो ग्लोबल इक्विटी वैल्यूएशन में लगभग 25% तक की गिरावट आ सकती है।

इन सब चिंताओं के बीच, Morgan Stanley ने अमेरिकी संपत्तियों (US Assets) पर दांव बढ़ा दिया है। फर्म का मानना है कि अमेरिका में कमाई (Earnings) की संभावनाएं बेहतर हैं। हालिया भू-राजनीतिक घटनाओं के बाद से, निवेशक US Treasuries और कैश को एक सुरक्षित पनाहगाह के तौर पर देख रहे हैं, खासकर इसलिए क्योंकि अमेरिका यूरोप की तुलना में ऊर्जा का कम आयात करता है। US 10-साल के ट्रेजरी नोट की यील्ड (Yield) लगभग 4.394% तक पहुंच गई है, जो इस 'फ्लाइट टू सेफ्टी' को दर्शाता है।

दूसरी ओर, जापानी स्टॉक्स (Japanese Stocks) पर दबाव बने रहने की आशंका है। Morgan Stanley को सप्लाई चेन में दिक्कतें और ग्लोबल मंदी का असर वहां देखने को मिल सकता है, खासकर अगर हॉरमज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग रूट लंबे समय तक बाधित होते हैं।

वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल कई जोखिमों से भरा है। $100-$120 प्रति बैरल या उससे अधिक की तेल कीमतें उपभोक्ता खर्च को कम कर सकती हैं और 'फेड पैरालिसिस' (Fed Paralysis) की स्थिति पैदा कर सकती हैं, जहां महंगाई बढ़ने पर भी ग्रोथ गिर सकती है, जिससे सेंट्रल बैंकों के लिए नीतियां बनाना मुश्किल हो जाएगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि अमेरिका में मंदी (Recession) की 30% से 40% संभावना है, और अगर तेल की कीमतें बढ़ती रहीं तो यह 50% तक जा सकती है। VIX इंडेक्स का 30 के पार जाना संकट की स्थिति का संकेत दे रहा है।

ऐतिहासिक रूप से, 1990 के खाड़ी युद्ध के दौरान तेल की कीमतों में स्पाइक के चलते S&P 500 में गिरावट आई थी। हालांकि, आज का माहौल मौजूदा उच्च वैल्यूएशन, खासकर US टेक में, के कारण और भी गंभीर है। JPMorgan Chase ने S&P 500 के लिए साल के अंत का लक्ष्य 7,500 से घटाकर 7,200 कर दिया है। Goldman Sachs अगले 12 महीनों में ग्लोबल इक्विटी के लिए 11% रिटर्न का अनुमान लगा रहा है, लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन को अधिक बताता है।

कुल मिलाकर, बाजारों पर भू-राजनीतिक घटनाओं का असर बना रहेगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मिडिल ईस्ट संघर्ष तेल की सप्लाई को कब तक और कितना प्रभावित करेगा। निवेशक अब तेल की मांग में गिरावट और OPEC+ की ओर से कीमतों को नियंत्रित करने के कदमों पर भी ध्यान दे रहे हैं।

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