क्यों बदला आउटलुक?
मूडीज ने यह फैसला चीन की इकोनॉमिक और फिस्कल रेसिलिएंस (Fiscal Resilience) को देखते हुए लिया है। मूडीज को उम्मीद है कि चीन की इकोनॉमी 2026 में 4.5% और 2027 में 4.2% की दर से ग्रो (Grow) कर सकती है। रेटिंग एजेंसी का यह कहना है कि चीन की मजबूत इकोनॉमी और निर्यात क्षमता इन चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होगी। पिछले साल दिसंबर 2023 में प्रॉपर्टी सेक्टर और फिस्कल स्ट्रेंथ को लेकर चिंताएं थीं, जिन्हें अब बेहतर ढंग से संभाला गया माना जा रहा है। चीन के फाइनेंस मिनिस्ट्री ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि वे बाहरी अनिश्चितताओं से निपटने के लिए स्वस्थ आर्थिक विकास जारी रखेंगे।
कर्ज़ का बढ़ता पहाड़
हालांकि, इस स्टेबल आउटलुक के बीच एक बड़ी चिंता बढ़ते कर्ज़ की है। मूडीज का अनुमान है कि चीन का सरकारी कर्ज़ 2025 में जीडीपी (GDP) का 68.5% था, जो 2027 तक बढ़कर 82.4% तक पहुंच सकता है। और तो और, यह अनुमान है कि 2030 तक यह 90% के आंकड़े को भी पार कर सकता है। यहThe 'A' कैटेगरी के देशों के औसत कर्ज़, जो लगभग 57% जीडीपी है, उससे काफी ज़्यादा है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि 2034 तक सेंट्रल और लोकल गवर्नमेंट का कुल कर्ज़ 101% जीडीपी तक पहुंच सकता है।
रेटिंग एजेंसी की राय
मूडीज की A1 रेटिंग चीन को जापान, कुवैत और बेल्जियम जैसे देशों के साथ रखती है। वहीं, S&P ने चीन को A+ और फिच रेटिंग्स ने A रेटिंग दी हुई है। फिच रेटिंग्स ने तो अप्रैल 2025 में ही चीन की रेटिंग को 'A' तक डाउनग्रेड कर दिया था, जिसका मुख्य कारण कर्ज़ का बढ़ता स्तर था। मूडीज का मानना है कि चीन अपनी डोमेस्टिक सेविंग्स, कम इंटरेस्ट रेट्स और कैपिटल कंट्रोल्स (Capital Controls) के ज़रिए इस बढ़ते कर्ज़ को मैनेज कर लेगा, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) इस राह में मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।
भविष्य की रणनीति
चीन अपनी इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए 'न्यू क्वालिटी प्रोडक्टिव फोर्सेज' (New Quality Productive Forces) पर फोकस कर रहा है, जिसमें हाई-टेक सेक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी शामिल हैं। 2026-2030 के अपने 15वें फाइव-ईयर प्लान (Five-Year Plan) में यह इन सेक्टर्स को आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है। फाइनेंस मिनिस्ट्री 2026 के लिए प्रोएक्टिव फिस्कल पॉलिसी (Proactive Fiscal Policy) लाने की तैयारी में है, ताकि रोज़गार, बिजनेस और मार्केट्स को सपोर्ट मिल सके।
