भारत की मज़बूती पर Moody's का भरोसा
Moody's Ratings का मानना है कि भारत ने 2020 के बाद से ग्लोबल झटकों, जैसे कि महामारी, महंगाई में तेज़ी और भू-राजनीतिक तनावों का सामना काफी मज़बूती से किया है। एजेंसी ने भारत की मजबूत फॉरेक्स रिजर्व (forex reserves) और भरोसेमंद मॉनेटरी पॉलिसी (monetary policy) को इसकी बड़ी वजह बताया है। इसके चलते भारत, महंगाई को कंट्रोल में रखने और फ्लेक्सिबल एक्सचेंज रेट (flexible exchange rate) बनाए रखने में कामयाब रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के फॉरेक्स रिजर्व सितंबर 2024 तक लगभग $704.89 बिलियन डॉलर तक पहुंच गए थे, जिसने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और करेंसी में उतार-चढ़ाव को स्मूथ करने में मदद की है।
कर्ज़ का भारी बोझ है असली चिंता
हालांकि, इस अच्छी तस्वीर के साथ ही Moody's ने भारत की फिस्कल कमजोरियों को भी उजागर किया है। एजेंसी का मानना है कि देश पर बड़ा सरकारी कर्ज़ (government debt) और कमज़ोर फिस्कल बैलेंस (fiscal balance) भविष्य के आर्थिक झटकों से निपटने की भारत की क्षमता को सीमित करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का जनरल गवर्नमेंट डेट (general government debt) लंबे समय तक GDP के 80% से ऊपर रहने का अनुमान है। तुलना के लिए, ब्राजील का डेट-टू-जीडीपी अनुपात 2022 में लगभग 79.10% और दक्षिण अफ्रीका का 73.00% था, जबकि मेक्सिको का 2022 में 104.79% था।
Moody's ने चेतावनी दी है कि सरकारी खर्च बढ़ाने वाले कदम और ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता, कर्ज़ कम करने के प्रयासों को बाधित कर सकते हैं और उधार लेने की लागत (borrowing costs) बढ़ा सकते हैं। एजेंसी ने यह भी याद दिलाया कि 2025 में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ (tariffs) के कारण निफ्टी 50 (Nifty 50) और सेंसेक्स (Sensex) में काफी वोलेटिलिटी (volatility) देखने को मिली थी।
भविष्य का आउटलुक
भविष्य को लेकर, Moody's का भारत पर आउटलुक (outlook) स्टेबल (stable) है, लेकिन एजेंसी का अनुमान है कि बाहरी कारकों के चलते फिस्कल ईयर 2027 तक GDP ग्रोथ घटकर लगभग 6% रह सकती है, जो फिस्कल ईयर 2026 के अनुमानित 7.3% से कम है। महंगाई (inflation) भी फिस्कल ईयर 2026 के 2.4% से बढ़कर फिस्कल ईयर 2027 में 4.8% तक जा सकती है।
डिजिटलाइजेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और वित्तीय सुधार (financial reforms) अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं, लेकिन यह बड़ा कर्ज़ का बोझ और लगातार फिस्कल डेफिसिट (deficit) को कम करने की ज़रूरत, भविष्य के झटकों के खिलाफ मज़बूत नीतिगत कार्रवाई के लिए सरकार के पास सीमित गुंजाइश छोड़ते हैं।
