तमिलनाडु सरकार अपने वित्तीय हालात को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके लिए जाने-माने अर्थशास्त्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया की अध्यक्षता में एक 'रेवेन्यू ऑग्मेंटेशन कमेटी' का गठन किया गया है। इस कमेटी की पहली वर्चुअल मीटिंग हो चुकी है, जिसमें इसके काम करने का तरीका और लक्ष्य तय किए गए।
रेवेन्यू बढ़ाने का खास एजेंडा
इस कमेटी का मुख्य काम राज्य के लिए टैक्स और नॉन-टैक्स (गैर-कर) दोनों तरह से आय के नए स्रोत खोजना है। देश भर की राज्य सरकारें जहां विकास कार्यों पर खर्च बढ़ा रही हैं, वहीं वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रही हैं। ऐसे में, तमिलनाडु का यह कदम अपने आंतरिक संसाधनों को बेहतर बनाने का एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। नई आय के रास्ते तलाश कर और कलेक्शन में आ रही दिक्कतों को दूर करके, राज्य का लक्ष्य केंद्र सरकार पर अपनी निर्भरता कम करना है।
डेटा-संचालित सुझावों पर जोर
कमेटी के सुझावों को मजबूत डेटा का आधार देने के लिए, वित्त विभाग ने एक खास रिसर्च टीम तैयार की है। इसमें टैक्स पॉलिसी रिसर्च यूनिट और फाइनेंशियल डेटा एनालिटिक्स यूनिट के एक्सपर्ट्स शामिल हैं। ये टीम दूसरी भारतीय राज्यों के सफल रेवेन्यू मॉडल का अध्ययन करेगी ताकि तमिलनाडु में भी उन्हें लागू करने की संभावना जांची जा सके।
आगे की रणनीति
कमेटी का रोडमैप शॉर्ट-टर्म, मीडियम-टर्म और लॉन्ग-टर्म यानी छोटी, मध्यम और लंबी अवधि की योजनाओं को कवर करेगा। इसमें टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन, रेगुलेटरी सुधारों और विभिन्न आय-सृजन विभागों की कार्यक्षमता जैसे क्षेत्रों की जांच की जाएगी। रेवेन्यू लीकेज (राजस्व रिसाव) को रोकना, जो अक्सर कंप्लायंस की समस्याओं या पुराने कलेक्शन सिस्टम के कारण होता है, इस प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा होगा।
आगे की राह
पहली वर्चुअल मीटिंग के बाद, कमेटी जल्द ही एक फिजिकल मीटिंग करने की तैयारी में है, जो अगस्त में होनी तय है। इस मीटिंग में ठोस चर्चाएं शुरू होंगी। इस प्रक्रिया में विभिन्न स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) से सलाह-मशविरा भी किया जाएगा। कमेटी अपने कार्यकाल के दौरान ईमेल के जरिए जनता से सुझाव भी आमंत्रित करेगी।
बाजार पर क्या होगा असर?
निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए, इस कमेटी के काम के नतीजे राज्य की वित्तीय स्थिरता पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। अगर सुझावों को सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो राज्य से जुड़ी संस्थाओं की क्रेडिट प्रोफाइल बेहतर हो सकती है या राज्य में कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए रेगुलेटरी माहौल में बदलाव आ सकता है। तुरंत देखे जाने वाले मुख्य पहलू अगस्त में होने वाली मीटिंग के बाद कमेटी की पहली सिफारिशें होंगी और राज्य सरकार इन सुझावों को कितनी प्राथमिकता देती है।
