मानसून की Uneven बारिश से खरीफ बुवाई पर संकट! महंगाई बढ़ने का खतरा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
मानसून की Uneven बारिश से खरीफ बुवाई पर संकट! महंगाई बढ़ने का खतरा

पूरे भारत में भले ही साउथवेस्ट मानसून ने दस्तक दे दी हो, लेकिन बारिश का असमान वितरण चिंता का सबब बन गया है। पिछले साल के मुकाबले खरीफ फसलों की बुवाई में **21%** की भारी गिरावट आई है, जिससे खाद्य महंगाई, खासकर दलहन और तिलहन में, बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, अनाज का भंडार पर्याप्त है।

मानसून का असमान वितरण और खेती पर असर

भारत की सालाना बारिश का लगभग 75% हिस्सा लाने वाला साउथवेस्ट मानसून जुलाई के मध्य तक पूरे देश में फैल चुका है। अल नीनो को लेकर शुरूआती चिंताएं भले ही कम हो गई हों, लेकिन असल में बारिश का वितरण अब भी अनियमित बना हुआ है। यह अनिश्चितता कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रही है, जो भारतीय कार्यबल के लगभग 43% लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत है।

क्षेत्रीय घाटा और मौसम विभाग की चेतावनी

इंडिया मेटेरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने आने वाले हफ्ते में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है। मानसून का यह असमान पैटर्न पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों, जैसे बिहार और झारखंड में, ज्यादा देखने को मिल रहा है, जहां 37% की कमी दर्ज की गई है। भारत की लगभग आधी सिंचित भूमि पर ही सिंचाई की व्यवस्था है, ऐसे में इन क्षेत्रीय भिन्नताओं का सीधा असर फसल उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ता है।

खरीफ बुवाई के आंकड़े और महंगाई का जोखिम

6 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में खरीफ फसलों की बुवाई में 21% की कमी आई है। इसका सबसे बड़ा असर दलहन और तिलहन फसलों पर दिख रहा है। इन वस्तुओं के लिए भारत आयात पर काफी निर्भर है, जो घरेलू उत्पादन में किसी भी कमी के प्रति उन्हें संवेदनशील बनाता है। यदि बुवाई में यह कमी जारी रहती है, तो खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। हालांकि, भारत के पास गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार है, लेकिन दलहन जैसी प्रोटीन युक्त फसलों के उत्पादन में बड़ी रुकावट आने से आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ सकता है और खुदरा महंगाई दर, जो हाल ही में 4.4% दर्ज की गई थी, पर भी असर पड़ सकता है।

ग्रामीण रोजगार योजनाओं के सामने वित्तीय अड़चनें

आर्थिक माहौल को और जटिल बनाते हुए, 1 जुलाई से 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन ग्रामीण' नामक योजना शुरू की गई है। यह ग्रामीण रोजगार योजना किसानों की आय बढ़ाने में मदद करने के लिए बनाई गई है। हालांकि, इस योजना के लिए राज्य सरकारों से भी फंड की जरूरत है, जिससे इसके लागू होने में देरी हो सकती है। कई राज्य जो पहले से ही वित्तीय तंगी झेल रहे हैं, उन्होंने आवश्यक राशि देने में हिचकिचाहट दिखाई है, जिससे योजना के तत्काल प्रभाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

निवेशकों को आने वाले हफ्तों में खरीफ फसलों की बुवाई पर बारीकी से नजर रखनी होगी ताकि उत्पादन पर पड़ने वाले असर का अंदाजा लगाया जा सके। दलहन और तिलहन बाजारों का प्रदर्शन, साथ ही ग्रामीण खर्च को बढ़ावा देने में सरकार की क्षमता, खाद्य महंगाई की संभावना और उपभोक्ता मांग पर इसके प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण कारक होंगे।

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