भारत में मॉनसून सीज़न की बारिश की कमी जुलाई में सुधरकर **13%** रह गई है, जो जून के आखिर में **35%** थी। हालांकि, मौसम विभाग (IMD) ने El Nino के बढ़ते असर के कारण अगस्त में सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
जुलाई में सुधरे मॉनसून के हालात
इस साल मॉनसून सीज़न ने जुलाई महीने में कुछ राहत दी है। जून के -35% के सूखे आंकड़े के मुकाबले, जुलाई में 1% सरप्लस बारिश दर्ज की गई, जिससे कुल कमी घटकर 13% पर आ गई है। यह सुधार उन इलाकों के लिए थोड़ी राहत लाया है जहां पानी की कमी थी। लेकिन, मॉनसून के बाकी समय के लिए चिंताएं बनी हुई हैं, खासकर भारत की लगभग आधी खेती योग्य जमीन मॉनसून पर निर्भर है।
मौसम विभाग की चेतावनी: El Nino का साया
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगस्त के लिए सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया है। इसकी मुख्य वजह El Nino का मजबूत होना है, जिसके कारण आमतौर पर भारत में मॉनसून की बारिश कम होती है। IMD के महानिदेशक एम मोहपात्रा ने बताया कि El Nino अगस्त तक बने रहने की उम्मीद है और सितंबर में यह और मजबूत हो सकता है, जिससे फसलों के लिए नमी की कमी हो सकती है।
रीजनल तस्वीर: कहीं खुशी, कहीं गम
भारत के मध्य इलाकों में 4% सरप्लस बारिश दर्ज की गई, जो फसलों के लिए अच्छा संकेत है। वहीं, दक्षिणी प्रायद्वीप में 23% की भारी कमी देखी गई है, और पूर्व व उत्तर-पूर्व इलाकों में 30% की कमी चिंताजनक है। ये आंकड़े निवेशकों के लिए अहम हैं, क्योंकि खाद, ट्रैक्टर और ग्रामीण खपत से जुड़ी कंपनियों की मांग सीधे तौर पर स्थानीय बारिश पर निर्भर करती है।
उम्मीद की किरण?
हालांकि El Nino एक बड़ी चुनौती है, मौसम विज्ञानी सितंबर में इंडियन ओशन डिपोल (IOD) के पॉजिटिव होने की संभावना पर भी नजर रख रहे हैं। एक पॉजिटिव IOD कभी-कभी El Nino के असर को कम कर सकता है और देर से होने वाली बारिश में मदद कर सकता है। इसके अलावा, जुलाई में बंगाल की खाड़ी में 24 कम दबाव के सिस्टम का बनना भी इस सरप्लस का एक कारण रहा, जो एक असामान्य पैटर्न था।
खरीफ फसल और ग्रामीण मांग पर नजर
जुलाई में औसत तापमान भी 1901 के बाद तीसरी बार सबसे अधिक दर्ज किया गया, जिससे वाष्पीकरण बढ़ा और फसलों पर नमी का दबाव बढ़ा। ऐसे में, निवेशक अगस्त और सितंबर की बारिश पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि यही दो महीने खरीफ फसल की अंतिम स्थिति तय करेंगे और आने वाले त्योहारी सीजन में ग्रामीण मांग की दिशा निर्धारित करेंगे।
