मानसून पर संकट! 16% बारिश की कमी, कहीं सूखा तो कहीं बाढ़

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
मानसून पर संकट! 16% बारिश की कमी, कहीं सूखा तो कहीं बाढ़

27 जुलाई 2026 तक, भारत में मानसून की बारिश में **16%** की कमी दर्ज की गई है। इस बार मानसून काफी अनियमित रहा है, जहां कुछ इलाकों में भीषण बाढ़ आ रही है, वहीं कई जगहों पर सूखे जैसे हालात हैं। यह स्थिति कृषि उत्पादन के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

Detailed Coverage

देश भर में बारिश का असमान वितरण

भारत में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून, जो देश की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, काफी अस्थिर रहा है। 4 जून 2026 को शुरू हुए इस मानसून सीजन में 27 जुलाई तक पूरे देश में बारिश की 16% की कमी देखी गई है। यह कमी अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रही है, क्योंकि एक तरफ जहां कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत है, वहीं दूसरी तरफ कुछ जगहों पर अत्यधिक और विनाशकारी बारिश से बाढ़ आ रही है।

क्षेत्रीय असमानता और आर्थिक असर

बारिश का वितरण बेहद असमान है। पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश की सबसे ज्यादा 30% की कमी है, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीप में यह 29% है। इसके विपरीत, लद्दाख जैसे राज्यों में 196% तक अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई है। यह असमान पैटर्न निवेशकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि खेती पूरी तरह से समय पर और पर्याप्त बारिश पर निर्भर करती है। देश भर के करीब 53% जिलों में फिलहाल बारिश की कमी या बड़े पैमाने पर घाटा दर्ज किया जा रहा है। दूसरी ओर, असम जैसे राज्यों में भयंकर बाढ़ ने 700,000 से अधिक लोगों को प्रभावित किया है और हजारों लोगों को विस्थापित कर दिया है।

अनियमित मानसून के पीछे के कारण

वैज्ञानिकों और जलवायु डेटा के अनुसार, इस अनियमितता के पीछे कई कारण हैं। प्रशांत महासागर में बढ़ते अल नीनो (El Niño) का प्रभाव एक प्रमुख कारक है, जिसके अक्टूबर से दिसंबर के बीच बहुत मजबूत होने की 81% संभावना है। अल नीनो का भारतीय मानसून पर अक्सर नकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही, ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम की चरम घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे सूखे की अवधि लंबी हो रही है और बारिश अधिक हिंसक और केंद्रित हो रही है, जो अचानक बाढ़ और भूस्खलन का कारण बन रही है।

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता ग्रामीण खपत और कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर है। कमजोर या देरी से आने वाला मानसून प्रमुख खरीफ फसलों की पैदावार को कम कर सकता है, जिससे ग्रामीण आय पर दबाव पड़ सकता है और उपभोक्ता वस्तुओं व खाद-बीज जैसे कृषि इनपुट की मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे या फसलों को नष्ट करने वाली चरम मौसमी घटनाएं स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला में बाधा डाल सकती हैं, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं। निवेशक प्रमुख फसलों के आगामी उत्पादन अनुमानों पर नज़र रख सकते हैं और अपनी अगली तिमाही आय रिपोर्ट में एफएमसीजी (FMCG) और एग्रोकेमिकल (Agrochemical) कंपनियों की ग्रामीण मांग के रुझानों पर टिप्पणियों को देख सकते हैं। सीजन के बाकी बचे दिनों में बारिश की तीव्रता और फैलाव कृषि परिणामों और महंगाई पर सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.