देश के पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी मॉनसून बारिश ने हाहाकार मचा दिया है। अब तक **120** से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, और सड़कें, रेलवे, बिजली ग्रिड बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश और असम जैसे इलाकों में कनेक्टिविटी टूटने से आर्थिक गतिविधियों और प्रोजेक्ट्स पर भी असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
Detailed Coverage
उत्तर और पूर्वोत्तर में मॉनसून का तांडव
देश के हिमालयी और पूर्वोत्तर इलाकों में जारी मॉनसून सीज़न ने तबाही मचा रखी है। अब तक 120 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है। हिमाचल प्रदेश, असम, जम्मू और कश्मीर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य गंभीर रूप से प्रभावित हैं, जहाँ जनजीवन और ज़रूरी सेवाओं में भारी बाधा आ रही है। सड़कों, पुलों और रेलवे लाइनों के टूटने से सामानों की आवाजाही और ज़रूरी सेवाओं के रखरखाव में बड़ी चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं।
हिमाचल प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजली संकट
खासकर हिमाचल प्रदेश में हालात बहुत खराब हैं। सिर्फ जुलाई में भूस्खलन और दुर्घटनाओं में 66 लोगों की मौत हो चुकी है। कांगड़ा जैसे जिलों में बादल फटने से घरों और खेती को भारी नुकसान हुआ है। इसका असर जनसेवाओं पर भी दिख रहा है: 145 सड़कें अभी भी बंद हैं, जिससे राज्य में ट्रांसपोर्टेशन मुश्किल हो गया है। साथ ही, बिजली और पानी की सप्लाई भी बुरी तरह प्रभावित है, 508 बिजली ट्रांसफॉर्मर खराब हो चुके हैं और 43 पीने के पानी की स्कीमें ठप पड़ी हैं। इन मुश्किल हालातों में यहाँ काम कर रही कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के प्रोजेक्ट्स में देरी होने की आशंका है।
जम्मू और कश्मीर में ट्रांसपोर्ट और बिजली की दिक्कतें
जम्मू और कश्मीर में भारी बारिश और झेलम व चेनाब नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण अधिकारियों को सलाहकारी कदम उठाने पड़े हैं, जैसे सलाल बांध के गेट खोलना। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पूंछ और राजौरी समेत कई जिलों में भारी बारिश और अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की है। ये पर्यावरणीय हालात क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं, जिससे बिजली और ट्रांसपोर्ट सुविधाओं मेंटेनेंस का खर्च बढ़ जाता है और वे अस्थायी तौर पर बंद हो जाती हैं। मौसम ठीक होने के बाद बहाली की गति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।
पूर्वोत्तर में लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी की मुश्किलें
असम और पड़ोसी पूर्वोत्तर राज्यों में भयंकर बाढ़ आई हुई है, ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इस स्थिति ने कनेक्टिविटी को बुरी तरह प्रभावित किया है, ऊपरी असम में रेलवे का संचालन ट्रैक खराब होने और सुरक्षा चिंताओं के कारण लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा। 5.6 लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं, और नागालैंड व अरुणाचल प्रदेश में घरों को भारी नुकसान की खबर है। मुख्य ट्रांसपोर्ट रूट्स के बंद होने से सिर्फ स्थानीय व्यापार ही नहीं, बल्कि ज़रूरी सामानों की आवाजाही भी धीमी हो गई है, जिसका असर लोकल सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आगे भी हालात गंभीर बने रहने की संभावना है, ऐसे में सरकार कितनी जल्दी ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक कर पाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
