प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों से अपील कर रहे हैं कि वे अधिक से अधिक भारत में ही यात्रा करें। उनका कहना है कि यह एक देशभक्ति का कर्तव्य है जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, सप्लाई चेन की दिक्कतों और बढ़ती कीमतों के बीच देश को संभालने में मदद करेगा।
यह योजना वित्त मंत्रालय को एक लचीली प्रणाली बनाने का मौका देती है, जिससे नागरिकों और सरकार दोनों को फायदा होगा। साथ ही, इसका मकसद डिजिटल इंडिया पहलों का इस्तेमाल करके पर्यटन को बेहतर बनाना और राष्ट्रीय टैक्सपेयर बेस को बढ़ाना भी है।
मौजूदा LTA नियम क्या कहते हैं?
फिलहाल, लीव ट्रैवल कंसेशन (LTA) के टैक्स फायदे मुख्य रूप से सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए हैं। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 10 (5) के तहत, यह छूट केवल हवाई, रेल या सड़क मार्ग की यात्रा के किराए तक सीमित है, जिसे हर चार साल में दो बार इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें खाना, ठहरना और स्थानीय परिवहन का खर्च शामिल नहीं है। इस सीमित दायरे की वजह से अमीर भारतीय, जो अक्सर विदेश में छुट्टियां बिताते हैं, घरेलू यात्रा का विकल्प कम ही चुनते हैं।
घरेलू यात्रा के लिए नए टैक्स छूट का प्रस्ताव
एक नए ढांचे के तहत, बेहतर अनुभव, सुगम यात्रा व्यवस्था, कम लागत और महत्वपूर्ण टैक्स छूट देकर घरेलू यात्रा को काफी बढ़ावा दिया जा सकता है। मुख्य विचार LTA नियमों को बदलना है, जिससे हर साल प्रति टैक्सपेयर ₹5 लाख तक के खाने, ठहरने और स्थानीय परिवहन के साथ-साथ विभिन्न यात्रा माध्यमों के लिए टैक्स-फ्री भत्ते की अनुमति मिल सके। खास जगहों जैसे कश्मीर, लद्दाख या पूर्वोत्तर के लिए ₹6 लाख की कैप का भी प्रस्ताव है। यदि समय पर टैक्स रिटर्न फाइल किया जाता है और यात्रा का भुगतान डिजिटल रूप से किया जाता है, तो ये टैक्स-फ्री रकम हर चार साल में एक बार के बजाय सालाना उपलब्ध हो सकती हैं।
व्यापक फायदे: ज्यादा टैक्सपेयर्स, ज्यादा रेवेन्यू
सुधार का एक अहम हिस्सा LTA के फायदे केवल सैलरी वाले कर्मचारियों तक सीमित न रखकर पेशेवरों, कलाकारों, खिलाड़ियों और अन्य टैक्सपेयर्स तक फैलाना है। यात्रा खर्चों के लिए डिजिटल भुगतान की अनिवार्यता होटलों और परिवहन प्रदाताओं को टैक्स नेट में लाएगी, जिससे टैक्सपेयर बेस को विस्तारित करने और आय की बेहतर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस कदम से GST और TCS कलेक्शन में वृद्धि होने की उम्मीद है, जो नई छूटों से होने वाले किसी भी शुरुआती राजस्व घाटे को संतुलित करने में मदद करेगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करने के लिए लक्षित टैक्स प्रोत्साहन का सुझाव दिया गया है, जिससे कश्मीर और पूर्वोत्तर जैसे क्षेत्रों के लोग भारत के अन्य हिस्सों को एक्सप्लोर कर सकें।
अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा
इन प्रस्तावित बदलावों का लक्ष्य एक 'विन-विन' स्थिति बनाना है: विदेशी मुद्रा खर्च को कम करना और भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को बेहतर बनाना। कुल मिलाकर, यह योजना घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और डायरेक्ट टैक्सपेयर बेस को काफी हद तक बढ़ाने का लक्ष्य रखती है, जिससे संतुलित आर्थिक विकास होगा।