प्रधानमंत्री मोदी ने महत्वपूर्ण खनिज रणनीति की समीक्षा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों (critical mineral resources) को सुरक्षित करने और घरेलू रीसाइक्लिंग क्षमताओं (recycling capabilities) को बढ़ावा देने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं। एक उच्च-स्तरीय त्रैमासिक समीक्षा में, विदेशी संपत्ति अधिग्रहण (overseas asset acquisitions) और महत्वपूर्ण खनिजों की रीसाइक्लिंग के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस रणनीतिक कदम को राष्ट्र के दीर्घकालिक आर्थिक और सुरक्षा हितों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना
भारत सक्रिय रूप से महत्वपूर्ण खनिजों के विदेशी अधिग्रहण का पीछा कर रहा है। ये खनिज, जिनमें लिथियम, निकल, कोबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी तत्व (rare earth elements) शामिल हैं, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स (advanced electronics) और राष्ट्रीय रक्षा जैसे क्षेत्रों को शक्ति प्रदान करने के लिए अनिवार्य हैं। स्थिर आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करके, भारत आयात निर्भरता को कम करने और अपनी 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है, ताकि महत्वाकांक्षी ऊर्जा संक्रमण योजनाओं के लिए कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
घरेलू रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना
इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण घटक ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना है, जिसे पिछले साल मंजूरी दी गई थी, जिसे महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। योजना का लक्ष्य प्रति वर्ष कम से कम 270 किलोटन (kilotonnes) की रीसाइक्लिंग क्षमता विकसित करना है। इससे सालाना लगभग 40 किलोटन महत्वपूर्ण खनिजों का उत्पादन द्वितीयक स्रोतों (secondary sources) से होने का अनुमान है। इस पहल से लगभग ₹8,000 करोड़ के निवेश को आकर्षित करने और लगभग 70,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission)
ये प्रयास व्यापक राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission) के अभिन्न अंग हैं। सात वर्षों में ₹34,300 करोड़ के कुल परिव्यय (outlay) के साथ, यह मिशन महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और भारत की हरित ऊर्जा भविष्य (green energy future) की ओर यात्रा को गति देने का लक्ष्य रखता है।
प्रभाव
महत्वपूर्ण खनिजों में सरकार की आक्रामक रणनीति खनन सेवाओं (mining services), इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी निर्माण (battery manufacturing for EVs), नवीकरणीय ऊर्जा घटक उत्पादन (renewable energy component production) और रक्षा निर्माण (defence manufacturing) में शामिल भारतीय कंपनियों को महत्वपूर्ण रूप से लाभ पहुंचा सकती है। बढ़ी हुई घरेलू क्षमता और आश्वस्त वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं इन विकास क्षेत्रों के जोखिम को कम करेंगी (de-risk) और अधिक निवेश आकर्षित करेंगी, जिससे प्रमुख खिलाड़ियों के लिए शेयर मूल्य में वृद्धि (stock value appreciation) हो सकती है।
प्रभाव रेटिंग: 7/10
कठिन शब्दों की व्याख्या
- महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals): खनिजों का एक समूह जिन्हें किसी देश की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक माना जाता है, जो आधुनिक तकनीकों और रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Rare Earth Elements): 17 धात्विक तत्वों का एक समूह जिनके अद्वितीय गुण उच्च-तकनीकी अनुप्रयोगों, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, मैग्नेट (magnets) और उत्प्रेरक (catalysts) के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition): जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा प्रणालियों से सौर, पवन और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे नवीकरणीय और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर वैश्विक बदलाव।
- रीसाइक्लिंग क्षमता (Recycling Capacity): अपशिष्ट सामग्री की अधिकतम मात्रा जिसे मूल्यवान संसाधन प्राप्त करने के लिए सालाना संसाधित किया जा सकता है।
- द्वितीयक स्रोत (Secondary Sources): प्राथमिक खनन के बजाय, उपयोग किए गए उत्पादों या औद्योगिक उप-उत्पादों की रीसाइक्लिंग से प्राप्त सामग्री।
- राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission): महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक लचीली घरेलू आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक व्यापक सरकारी कार्यक्रम।