भू-राजनीतिक चिंताओं से फ्यूचर्स में गिरावट
मिडिल ईस्ट में लगभग पांच हफ्तों से चल रहा संघर्ष, जिसमें अभी तक कोई शांति समझौता नहीं हुआ है, वैश्विक निवेशकों के लिए चिंता का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। इस अनिश्चितता के कारण दुनिया भर के बाजारों में बिकवाली हावी है। ट्रेडिंग खुलने के साथ ही वॉल स्ट्रीट फ्यूचर्स (Wall Street Futures) में भारी गिरावट देखी गई। डाऊ जोन्स फ्यूचर्स (Dow Jones Futures) 300 अंकों से ज्यादा नीचे गिरे, जबकि एस&पी 500 (S&P 500) और नैस्डैक फ्यूचर्स (Nasdaq Futures) में भी बड़ी गिरावट के संकेत मिले। यह बाजार से जोखिम वाली संपत्तियों को हटाने का साफ संकेत है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास की संभावित बाधाएं भी चिंताएं बढ़ा रही हैं, खासकर ईरान द्वारा नियंत्रण हासिल करने की खबरों के बाद, जिसका असर तेल निर्यात पर पड़ सकता है।
कच्चे तेल में भारी उछाल, महंगाई की चिंताएं बढ़ीं
संघर्ष के बढ़ने से एनर्जी मार्केट (Energy Markets) में हलचल मच गई है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत $116.50 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $100 के ऊपर कारोबार कर रहा है। मार्च के महीने में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 51% का इजाफा हुआ है, जो इसे अब तक की सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी के करीब ले जा सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में यह तेज उछाल वैश्विक महंगाई (Global Inflation) को लेकर चिंताएं और बढ़ा रहा है, क्योंकि आपूर्ति में बाधाएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। इतिहास गवाह है कि मिडिल ईस्ट के संघर्षों का अक्सर तेल की कीमतों पर गहरा असर पड़ा है, जैसे 1970 के दशक का एनर्जी संकट और पहला खाड़ी युद्ध। इस बीच, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (U.S. Dollar Index) 100 के पार निकल गया है। आमतौर पर, मजबूत डॉलर, तेल जैसी डॉलर-डीनॉमिनेटेड कमोडिटी (Commodities) पर दबाव डालता है, लेकिन वर्तमान सप्लाई शॉक (Supply Shock) इस प्रभाव को हावी होता दिख रहा है।
अहम डेटा और पॉवेल का भाषण बाजार की दिशा तय करेंगे
इस हफ्ते, जो गुड फ्राइडे (Good Friday) के कारण छोटा होगा, कई अहम आर्थिक आंकड़े जारी होने हैं। निवेशक मंगलवार को अमेरिकी जॉब ओपनिंग्स (Job Openings) और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस (Consumer Confidence) के आंकड़े देखेंगे। इसके बाद बुधवार को रिटेल सेल्स (Retail Sales), एडीपी जॉब्स रिपोर्ट (ADP Jobs Report) और मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई (Manufacturing PMI) के आंकड़े आएंगे। गुरुवार को इनिशियल जॉबलेस क्लेम्स (Initial Jobless Claims) और ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) के आंकड़े जारी होंगे। मार्च के नॉन-फार्म पेरोल (Non-Farm Payrolls) की रिपोर्ट भी इसी हफ्ते आनी है। इन सबके बीच, सोमवार देर शाम फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल (Jerome Powell) का एक बहुप्रतीक्षित भाषण होगा। पॉवेल के भाषण से फेड की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) की दिशा को लेकर अहम संकेत मिलने की उम्मीद है, खासकर महंगाई और वैश्विक अस्थिरता के आर्थिक प्रभाव पर। फेड ने हाल ही में ब्याज दरों को स्थिर रखा था और कहा था कि मिडिल ईस्ट संकट के कारण ऊर्जा की ऊंची कीमतें निकट भविष्य में महंगाई को बढ़ा सकती हैं। यह नीति निर्माताओं के लिए एक मुश्किल संतुलन बनाने वाली स्थिति है।
परस्पर विरोधी जोखिमों से अनिश्चितता
बाजार इस वक्त कई जुड़े हुए जोखिमों का सामना कर रहा है। मिडिल ईस्ट का संघर्ष ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्गों के लिए खतरा पैदा कर रहा है, जिससे लंबे समय तक महंगाई बढ़ने और 'स्टैगफ्लेशन' (Stagflation) जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है, जो 1970 के दशक के संकटों की याद दिलाती है। महंगाई के इस माहौल में फेडरल रिजर्व के लिए अपना काम और भी मुश्किल हो गया है, जिससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें टल सकती हैं और कर्ज महंगा हो सकता है, जो आर्थिक गतिविधियों को धीमा कर सकता है। एस&पी 500 (S&P 500) अपने जनवरी के उच्चतम स्तर से 8.7% नीचे आ गया है, जो लगातार पांचवें सप्ताह की गिरावट है, जबकि नैस्डैक (Nasdaq) और डाऊ जोन्स (Dow Jones) करेक्शन टेरिटरी (Correction Territory) में प्रवेश कर चुके हैं। ऐतिहासिक रूप से, लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष और तेल की कीमतों में लगातार उछाल से बड़े बाजार में गिरावट और आर्थिक मंदी आ सकती है।
बाजार में अस्थिरता जारी रहने की उम्मीद
बाजार की भावना मिडिल ईस्ट में विकसित हो रही घटनाओं और फेड से मिलने वाले संकेतों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले आर्थिक आंकड़े, विशेष रूप से नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट, और चेयरमैन पॉवेल की टिप्पणियां महंगाई, आर्थिक वृद्धि और मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर उम्मीदों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितता को देखते हुए, बाजार में अस्थिरता (Volatility) जारी रहने की संभावना है। एनर्जी मार्केट में और अधिक बाधाएं या फेड की ओर से आक्रामक रुख बाजार की कमजोरी को बढ़ा सकते हैं। वहीं, कूटनीतिक सफलताएं या महंगाई में नरमी से राहत मिल सकती है। बाजार एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहां तात्कालिक भू-राजनीतिक दबावों और लंबी अवधि की महंगाई व ब्याज दर के दृष्टिकोण के बीच संतुलन साधा जा रहा है।