बाज़ार में क्यों मची अफरातफरी?
सोमवार, 2 मार्च 2026 को पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (PSX) में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। बेंचमार्क KSE-100 इंडेक्स लगभग 9% गिर गया, कुछ ही घंटों में 15,000 से ज़्यादा अंक गंवा दिए। बिकवाली इतनी तेज़ थी कि KSE-30 इंडेक्स के सर्किट ब्रेकर हिट होने के बाद ट्रेडिंग को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव था, जिसने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
ऊर्जा संकट का सीधा असर
पाकिस्तान, जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, इस तनाव से सीधे तौर पर प्रभावित हुआ। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे अहम समुद्री मार्गों पर संभावित खतरे ने वैश्विक क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों को $80 प्रति बैरल के करीब पहुंचा दिया है, और विशेषज्ञों का मानना है कि यह $100 तक जा सकती है।
महंगाई और आम आदमी पर बोझ
तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ रहा है। सरकार ने 1 मार्च 2026 से पेट्रोल की कीमतों में ₹8 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इससे महंगाई (Inflation) बढ़ने का अनुमान है, जो जनवरी 2026 में 5.8% थी, वह फरवरी में 7.4% तक पहुंच सकती है और आगे भी बढ़ सकती है।
अर्थव्यवस्था की कमज़ोरियां उजागर
इस भू-राजनीतिक संकट ने पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक कमज़ोरियों को और गहरा कर दिया है। पाकिस्तानी रुपया (PKR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 279.50 के आसपास बना हुआ है। देश पर भारी कर्ज़ है और करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) बढ़ने की आशंका है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर दबाव बढ़ेगा। खाड़ी देशों के बाज़ार भी गिरे, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है।
आगे की राह
पाकिस्तान शेयर बाज़ार में अस्थिरता बने रहने की उम्मीद है, क्योंकि निवेशक मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर नज़र रखेंगे। IMF मिशन 2 मार्च 2026 को ऋण किस्त पर बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहा है, जो बाज़ार में कुछ स्थिरता ला सकता है। हालांकि, अगर क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है, तो यह विदेशी निवेश को हतोत्साहित कर सकता है और देश की आर्थिक अनिश्चितता को बढ़ा सकता है।