मिडिल ईस्ट जंग का डर! इकोनॉमी पर गहरा असर, 'स्टैगफ्लेशन' का खतरा बढ़ा

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
मिडिल ईस्ट जंग का डर! इकोनॉमी पर गहरा असर, 'स्टैगफ्लेशन' का खतरा बढ़ा
Overview

मिडिल ईस्ट में पिछले **सात हफ्तों** से जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। इस हफ्ते आने वाले ग्लोबल बिजनेस सर्वे (PMI) के नतीजों में गिरावट की आशंका है, जो कि कमजोर पड़ती ग्रोथ का संकेत दे रहे हैं। इससे महंगाई और धीमी आर्थिक रफ्तार के मिले-जुले खतरे, जिसे 'स्टैगफ्लेशन' कहते हैं, के बढ़ने की चिंताएं बढ़ गई हैं।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

दुनिया भर में इकोनॉमी पर मंडरा रहा खतरा

इस हफ्ते जारी होने वाले ग्लोबल बिजनेस सर्वे (PMI) के आंकड़े मिडिल ईस्ट में सात हफ्तों से चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव को साफ तौर पर दिखाएंगे। अनुमान है कि जर्मनी, फ्रांस और यूके जैसे प्रमुख देशों के परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) में गिरावट आएगी, जो कि ग्रोथ में सुस्ती का संकेत देंगे। वहीं, अमेरिका के इंडिकेटर्स के कुछ स्थिर रहने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक आर्थिक तस्वीर थोड़ी मिली-जुली रहेगी।

'स्टैगफ्लेशन' की चिंताएं बढ़ीं

यह सब मिलकर 'स्टैगफ्लेशन' की चिंताओं को और बढ़ाएगा। 'स्टैगफ्लेशन' एक ऐसी मुश्किल स्थिति होती है जहां महंगाई तो बढ़ती रहती है, लेकिन आर्थिक ग्रोथ ठहर जाती है। S&P Global के चीफ बिजनेस इकोनॉमिस्ट क्रिस विलियमसन जैसे विशेषज्ञों ने इस जोखिम की ओर इशारा किया है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी संभावित 'नियर-रिसेशन्स' यानी मंदी के करीब पहुंचने की चेतावनी दी है। IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा का कहना है कि संघर्ष का असर 'पहले ही इकोनॉमी में शामिल हो चुका है' (baked in) और रिकवरी धीमी रहेगी।

सेंट्रल बैंक के सामने बड़ी चुनौती

दुनिया भर के सेंट्रल बैंक इस आर्थिक हालात पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के चीफ इकोनॉमिस्ट फिलिप लेन ने कहा है कि सर्वे के आंकड़े ब्याज दर (interest rate) के फैसलों को काफी हद तक प्रभावित करेंगे। अधिकारी फ्रांस के बिजनेस कॉन्फिडेंस, जर्मनी के Ifo बिजनेस क्लाइमेट गेज और अमेरिका के मिशिगन यूनिवर्सिटी के कंज्यूमर सेंटीमेंट इंडेक्स जैसे महत्वपूर्ण इंडिकेटर्स पर नजर रख रहे हैं।

इसके अलावा, निवेशकों का ध्यान फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन पद के उम्मीदवार केविन वॉर्श की सुनवाई पर रहेगा। बाजार यह जानना चाहेगा कि बढ़ती महंगाई और तेल की कीमतों में उछाल के बीच, वह मौद्रिक नीति (monetary policy) को कैसे संतुलित करेंगे और ब्याज दरें घटाने की मांग के बीच क्या कदम उठाएंगे। बैंक ऑफ कनाडा भी ऐसे सर्वे जारी करेगा जो दिखाएंगे कि कंपनियां तेल के झटके (oil shock) का निवेश और नौकरियों पर क्या असर मानती हैं।

एशिया में महंगाई का डर

एशिया में, ग्लोबल एनर्जी शॉक से जुड़ी महंगाई की चिंताएं हावी हैं। चीन के लोन प्राइम रेट (loan prime rate) में बदलाव की उम्मीद कम है, क्योंकि वहां के नीति निर्माता ग्रोथ को सहारा देने और करेंसी की स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। न्यूजीलैंड के पहली तिमाही के महंगाई (inflation) के आंकड़े वहां के सेंट्रल बैंक के लिए अहम होंगे। इंडोनेशिया का सेंट्रल बैंक भी अपनी ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। इस हफ्ते ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत के PMI डेटा के साथ-साथ सिंगापुर, हांगकांग और जापान की महंगाई रिपोर्टें भी आएंगी, जो दिखाएंगी कि तेल की कीमतों का लागत पर कितना असर पड़ रहा है। हालांकि, फिलीपींस का सेंट्रल बैंक 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है, जो उस क्षेत्र में सख्त नीति का संकेत देता है।

यूरोप और अफ्रीका की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव

यूरोप से यूके के आर्थिक आंकड़े धीमी वेतन वृद्धि (wage growth) और उच्च महंगाई दिखा सकते हैं, जो कि मार्च में 3.3% तक पहुंच सकती है। बेल्जियम की क्रेडिट रेटिंग पर भी समीक्षा हो सकती है। दक्षिण अफ्रीका का रिजर्व बैंक संघर्ष के महंगाई पर पड़ने वाले असर की समीक्षा करेगा, जहां महंगाई में थोड़ी वृद्धि की संभावना है। तुर्की का सेंट्रल बैंक अपनी बेंचमार्क रेट 37% पर बनाए रख सकता है, हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा की कीमतों के दबाव के कारण दरें बढ़ाई भी जा सकती हैं। वहीं, रूस के सेंट्रल बैंक को बढ़ती महंगाई की चिंताओं के बीच दरें घटाने का सिलसिला जारी रखने पर फैसला लेना होगा।

लैटिन अमेरिका का मिला-जुला रुख

लैटिन अमेरिकी अर्थव्यवस्थाओं में मिले-जुले रुझान दिख रहे हैं। उरुग्वे और पैराग्वे के सेंट्रल बैंक दरों को स्थिर रख सकते हैं, क्योंकि वहां महंगाई कम बनी हुई है। कोलंबिया में आर्थिक उत्पादन में मामूली सुधार दिख सकता है, लेकिन विश्लेषकों ने लगातार महंगाई के दबाव के कारण 2026 तक की ग्रोथ के अनुमानों में कटौती की है। अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था में असमान ग्रोथ दिख रही है, जहां निर्माण (construction) और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर संघर्ष कर रहे हैं। मेक्सिको में मंदी की चिंताएं फिर बढ़ गई हैं, जिसे अमेरिका की धीमी ग्रोथ और व्यापार अनिश्चितताओं ने और गंभीर बना दिया है। ऐसे में, मेक्सिको के शुरुआती अप्रैल के कंज्यूमर प्राइस डेटा महंगाई के आउटलुक के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

नीति निर्माताओं के लिए 'स्टैगफ्लेशन' की दुविधा

वैश्विक अस्थिरता और लगातार बढ़ती महंगाई का यह मेल नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। तेल की कीमतों में पिछली उछाल ने दिखाया है कि ऊर्जा की ऊंची लागत सीधे तौर पर महंगाई और धीमी आर्थिक ग्रोथ को जन्म देती है। ऐसे में, सेंट्रल बैंकों को ग्रोथ को बढ़ावा देने और महंगाई को काबू करने के बीच एक नाजुक संतुलन बनाना पड़ता है। ग्रोथ को बढ़ावा देने की कोशिश महंगाई को और बढ़ा सकती है, जबकि महंगाई से सख्ती से लड़ने से आर्थिक मंदी और गहरी हो सकती है।

विश्लेषकों को 'स्टैगफ्लेशन' का महत्वपूर्ण जोखिम दिख रहा है, जो 1970 के दशक की तरह मजबूत कंज्यूमर डिमांड के बजाय चल रही सप्लाई की समस्याओं के कारण हो सकता है। आज की महंगाई लेबर मार्केट के टाइट होने और सरकारी खर्च जैसे कारकों से और जटिल हो गई है, जो इसे पिछली 'स्टैगफ्लेशन' अवधियों से अलग बनाती है। IMF की चेतावनियां बताती हैं कि संघर्ष के खत्म होने के बावजूद, आर्थिक समस्याएं जल्दी दूर नहीं होंगी, और अर्थव्यवस्थाएं लंबे समय तक धीमी ग्रोथ और ऊंची कीमतों का सामना कर सकती हैं।

आगे क्या?

इस हफ्ते आने वाले आर्थिक आंकड़े वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी देंगे। विश्लेषक सतर्कता से आशावादी बने हुए हैं, लेकिन महत्वपूर्ण नकारात्मक जोखिमों को स्वीकार करते हैं। जबकि कुछ अर्थव्यवस्थाओं में स्थिरता की उम्मीद है, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा व सप्लाई चेन पर उनका प्रभाव अनिश्चितता पैदा कर रहा है। सेंट्रल बैंकों से उम्मीद है कि वे महंगाई के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जबकि ग्रोथ इंडिकेटर्स पर भी बारीकी से नजर रखेंगे। बाजार इस पूरे साल कॉर्पोरेट अर्निंग्स, कंज्यूमर सेंटीमेंट और नीतिगत फैसलों की निगरानी करेगा।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.