भारतीय शेयर बाज़ार में आज सुस्ती छाए रहने की उम्मीद है। GIFT Nifty के शुरुआती संकेतों से लग रहा है कि बाज़ार फ्लैट खुलेगा। निवेशकों की नज़र NSE इंडेक्स रीबैलेंसिंग पर है, जो 29 जून को हुई थी और इससे शेयरों में उतार-चढ़ाव आ सकता है। वहीं, विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली को घरेलू निवेशकों (DII) की खरीदारी से सहारा मिलने का सिलसिला जारी है।
क्या हुआ?
भारतीय शेयर बाज़ार आज एक सपाट शुरुआत की ओर बढ़ रहा है। GIFT Nifty के शुरुआती संकेतों से फ्लैट ओपनिंग के आसार दिख रहे हैं। यह सोमवार के कमजोर सत्र के बाद हो रहा है, जहाँ निफ्टी 50 ने 110 अंक गिरकर 23,946 पर बंद हुआ था, और BSE सेंसेक्स 372 अंक गिरकर 76,728 पर आ गया था। भले ही ग्लोबल बाज़ार में मजबूती दिखी हो और अमेरिकी इंडेक्स रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए हों, घरेलू निवेशकों का रुख अभी सतर्क है।
इंडेक्स रीबैलेंसिंग का असर
आज ट्रेडर्स के लिए मुख्य फोकस नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा की गई तिमाही इंडेक्स रीबैलेंसिंग के बाद के असर पर है, जो 29 जून को लागू हुई थी। ऐसे समायोजन के दौरान, निफ्टी 50 इंडेक्स को ट्रैक करने वाले संस्थागत फंड्स को अपने पोर्टफोलियो को कंस्टीट्यूएंट स्टॉक्स की नई वेटेज के अनुसार बदलना पड़ता है।
मार्केट एनालिसिस बताता है कि Coal India, ICICI Bank, और HDFC Bank जैसे स्टॉक्स के इंडेक्स वेटेज में बढ़ोतरी हुई होगी, जिसके चलते इंडेक्स फंड्स को इन शेयरों को खरीदना पड़ता है। इसके विपरीत, Bharti Airtel और Maruti Suzuki जैसे स्टॉक्स के वेटेज में कमी आई होगी, जिससे इन्हीं फंड्स की ओर से बिकवाली का दबाव बन सकता है। निवेशक इन खास स्टॉक्स में बढ़ी हुई अस्थिरता (volatility) और ट्रेडिंग वॉल्यूम देख सकते हैं, क्योंकि बाज़ार इन समायोजनों को सोख रहा है।
FII और DII लिक्विडिटी का खेल
विदेशी और घरेलू पैसों के फ्लो के बीच का यह खेल बाज़ार के लिए एक अहम फैक्टर बना हुआ है। 29 जून को, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,350.10 करोड़ के शेयर बेचे थे। हालांकि, इस बिकवाली के दबाव का सामना घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने किया, जो ₹2,801.45 करोड़ के शेयर खरीदकर नेट खरीदार बने रहे। DIIs का यह सिलसिला विदेशी बिकवाली के खिलाफ एक बफर के रूप में काम कर रहा है और इंडेक्स को सपोर्ट दे रहा है।
ग्लोबल संकेत और कमोडिटी का प्रभाव
वैश्विक भावनाएँ फिलहाल मिली-जुली हैं। जहाँ अमेरिकी बाज़ारों ने हाल ही में भू-राजनीतिक तनाव कम होने की रिपोर्टों के बाद वापसी की है, वहीं एशियाई बाज़ार मिश्रित रूप से ट्रेड कर रहे हैं। भारतीय निवेशकों के लिए, ऊर्जा क्षेत्र एक प्रमुख निगरानी बिंदु बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड ऑयल फ्यूचर्स $75 प्रति बैरल के निशान से नीचे ट्रेड कर रहे हैं, जो वर्तमान में लगभग $72.59 पर हैं। चूंकि भारत कच्चे तेल का एक प्रमुख आयातक है, इसलिए ऊर्जा की कीमतों में लगातार गिरावट आम तौर पर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक साबित होती है और महंगाई की चिंताओं को प्रबंधित करने में मदद कर सकती है।
निवेशक क्या ट्रैक करें?
इंडेक्स रीबैलेंसिंग के अलावा, निवेशकों को उन सेक्टर्स में स्टॉक-विशिष्ट हलचल पर भी ध्यान देना चाहिए जिनमें पिछले सत्र में महत्वपूर्ण गतिविधि देखी गई थी। विशेष रूप से, सिल्वर सेक्टर के स्टॉक्स ने मार्केट कैपिटलाइजेशन में 2.36% की वृद्धि देखी, जबकि प्लास्टिक्स सेक्टर में 4.8% की गिरावट आई। इसके अतिरिक्त, 25 जून को GIFT Nifty कॉन्ट्रैक्ट्स में देखी गई रिकॉर्ड-हाई ओपन इंटरेस्ट (OI), जो कुल $21.56 बिलियन थी, उच्च भागीदारी स्तरों को दर्शाती है जो निकट अवधि की भावना को प्रभावित कर सकती है।
